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पश्चिम एशिया संकट का असर: माल ढुलाई 80% महंगी, कोलकाता पोर्ट पर फंसे सैकड़ों कंटेनर

शिपिंग महंगी, निर्यात कारोबार पर गहरा असर: जानिए क्या है हालात-पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सीधे भारत के निर्यात कारोबार पर दिखने लगा है। कोलकाता पोर्ट से यूरोप और अमेरिका जाने वाले माल की ढुलाई की कीमतें 60 से 80 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इस बढ़ती लागत ने निर्यातकों की कमर तोड़ दी है और कई के व्यापार में भारी गिरावट आई है।

अफ्रीकी रूट से बढ़ी लागत, निर्यातकों पर दबाव-कोलकाता कस्टम हाउस एजेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु चौधरी के मुताबिक, जहाजों को अब अफ्रीका के रास्ते भेजना पड़ रहा है, जिससे शिपिंग खर्च काफी बढ़ गया है। साथ ही शिपिंग कंपनियों ने वॉर सरचार्ज भी लगाया है, जिससे कुल खर्च 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इसका सीधा असर निर्यातकों के मुनाफे पर पड़ रहा है।

कंटेनरों की भारी कमी, माल अटका हुआ-स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कंटेनरों की भारी कमी हो गई है। कई कंटेनर लोडिंग के लिए पोर्ट पहुंचे, लेकिन आखिरी वक्त में उन्हें वापस लौटाना पड़ा। शिपिंग कंपनियां नए कंटेनर लेने से भी इनकार कर रही हैं, जिससे माल अटका हुआ है और निर्यात प्रभावित हो रहा है।

मार्च में निर्यात हुआ सबसे खराब, उद्योग जगत में चिंता-EEPC इंडिया के पूर्व चेयरमैन राकेश शाह ने बताया कि मार्च आमतौर पर निर्यात के लिए अच्छा महीना होता है, लेकिन इस बार यह सबसे खराब साबित हो सकता है। खासकर इंजीनियरिंग सेक्टर, जो 3-3.5 प्रतिशत ग्रोथ की उम्मीद कर रहा था, अब ठहराव की स्थिति में पहुंच सकता है।

एलपीजी संकट से उत्पादन पर असर-निर्यात पर सिर्फ शिपिंग ही नहीं, बल्कि एलपीजी की कमी का भी असर पड़ा है। कई उद्योगों में एलपीजी का इस्तेमाल फिनिशिंग प्रोसेस में होता है, खासकर इंजीनियरिंग उत्पादों में। इस कमी के कारण उत्पादन धीमा हो रहा है, जिससे ऑर्डर समय पर पूरा करना मुश्किल हो गया है।

सरकार की राहत योजना, लेकिन अस्पष्टता बनी हुई-सरकार ने ‘RELIEF’ योजना शुरू की है, जिसमें फ्रेट और बीमा लागत पर कुछ राहत दी जा रही है। हालांकि उद्योग जगत का कहना है कि योजना में कई बातें अभी स्पष्ट नहीं हैं। निर्यातकों को यह समझने में दिक्कत हो रही है कि उन्हें कुल कितना लाभ मिलेगा, जिससे उनकी योजना प्रभावित हो रही है।

पोर्ट और प्रशासन की कोशिशें जारी-पोर्ट अथॉरिटी और अन्य एजेंसियां स्थिति सुधारने की कोशिश कर रही हैं। टैरिफ में कुछ राहत दी गई है और नियमित बैठकें कर समाधान निकालने की कोशिश हो रही है। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने भी कुछ शुल्कों में छूट दी है ताकि फंसे कंटेनरों को राहत मिल सके।

सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर कौन-कौन से?-इस संकट का सबसे ज्यादा असर नाशवान सामान जैसे मछली और झींगा पर पड़ा है। इसके अलावा इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और दवाइयों का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। दवाइयां एयर कार्गो से भेजी जा रही हैं, लेकिन फ्लाइट कैंसिलेशन और रूट बदलने से एयर फ्रेट भी महंगा हो गया है।

आगे क्या होगा? निर्यातकों की बढ़ी चिंता-फिलहाल स्थिति में सुधार के कोई संकेत नहीं हैं। उद्योग जगत में असुरक्षा और चिंता का माहौल बना हुआ है। निर्यातकों को उम्मीद है कि आने वाली बैठकों में शिपिंग कंपनियां कुछ राहत देंगी, लेकिन जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक हालात सुधरना मुश्किल लग रहा है।

पश्चिम एशिया के तनाव ने भारत के निर्यात कारोबार को गहरा झटका दिया है। बढ़ती शिपिंग लागत, कंटेनर की कमी और एलपीजी संकट ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है। सरकार और प्रशासन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन वैश्विक स्थिति में सुधार के बिना राहत मिलना आसान नहीं होगा।

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