भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ा तनाव: ट्रंप प्रशासन का वार्ताकार भारत दौरे पर

भारत-अमेरिका व्यापार: क्या सुलझेंगे अनसुलझे मसले?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में गरमाहट!-आजकल भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर फिर से काफी चर्चा हो रही है। इसकी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास व्यापार वार्ताकार, ब्रेंडन लिंच का भारत दौरा। 16 सितंबर, मंगलवार को वे भारत के प्रतिनिधियों से मिलेंगे और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर गहराई से बातचीत करेंगे। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर 50% तक का भारी टैक्स लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों में थोड़ी खटास आ गई है। यह बातचीत दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह व्यापार से जुड़े कई बड़े मुद्दों को सुलझाने में मदद कर सकती है।
अमेरिका का भारत पर “अनुचित व्यापार” का आरोप-इस मुलाकात से ठीक पहले, व्हाइट हाउस के एक बड़े व्यापार स-लाहकार, पीटर नवारो ने भारत की व्यापार नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा टैक्स लगाता है और उनके गैर-टैरिफ नियम भी बहुत सख्त हैं। नवारो ने अमेरिका से कहा कि भारत के साथ भी वही तरीका अपनाया जाना चाहिए जो दूसरे देशों के साथ अपनाया जाता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि भारत गलत व्यापारिक तरीकों से अमेरिकी कंपनियों और मजदूरों को नुकसान पहुँचा रहा है। उनका यह भी कहना था कि भारत अमेरिका से कमाए पैसों से रूसी तेल खरीद रहा है और इस तरह से अप्रत्यक्ष रूप से रूस को हथियार खरीदने में मदद कर रहा है। यह बयान तब आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप सार्वजनिक रूप से भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने की बात कर रहे हैं।
रूस से तेल खरीद पर भी उठ रहे सवाल-नवारो यहीं नहीं रुके, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रिफाइनर यूक्रेन पर हमले के तुरंत बाद रूसी कंपनियों के साथ खड़े हो गए। उनका कहना है कि यह बहुत अजीब बात है कि भारत हमसे कमाए पैसों का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने में कर रहा है और रूस उस पैसे से हथियार खरीद रहा है। अमेरिका का मानना है कि भारत की यह नीति न केवल उनके व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि यूक्रेन युद्ध को भी अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है। इसी वजह से, रूस से तेल खरीदना भारत-अमेरिका संबंधों के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद साफ दिख रहे हैं।
दिल्ली में होगी अहम बातचीत-ब्रेंडन लिंच सोमवार रात दिल्ली पहुँच चुके हैं। यहाँ उनकी मुलाकात भारत के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल से होगी। अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दोनों देश अपनी बातचीत को “तेज” करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी पक्का किया कि यह दौरा सिर्फ एक दिन का होगा और इसमें सभी बड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जाएगी। इससे पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा था कि वे प्रधानमंत्री मोदी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर व्यापार की रुकावटों को दूर करना चाहते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर हर हफ्ते बातचीत जारी है, जो इन मुद्दों को सुलझाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
अमेरिकी टैक्स के बीच भारत की मुश्किलें-यह बैठक इसलिए भी बहुत खास मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने भारत से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स लगाया है। अगस्त के पहले हफ्ते में, अमेरिका ने दुनिया भर के व्यापार नियमों में बदलाव के तहत 25% का टैक्स लगाया था, और फिर 27 अगस्त को रूसी तेल से जुड़े सामानों पर अतिरिक्त 25% का टैक्स लगा दिया। कुल मिलाकर, अब भारत पर 50% तक का टैक्स का बोझ आ गया है। इसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है, और यही कारण है कि यह बैठक दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बातचीत से क्या नतीजा निकलता है।



