इंडिगो की उड़ान संकट: कैसे एक छोटी सी कमी ने देशभर की हवाई यात्रा को हिला दिया

इंडिगो का सिस्टम कैसे फिसला: पायलट प्लानिंग में बड़ी चूक- इंडिगो, भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन, जो सालों से समय पर उड़ानें भरने और बड़े पैमाने पर संचालन के लिए जानी जाती रही है, अचानक एक बड़े संकट में फंस गई। इस संकट की जड़ थी पायलटों की प्लानिंग में गंभीर कमी और DGCA के नए नियमों का दबाव। इंडिगो ने लंबे समय तक ‘लीन-स्टाफिंग’ मॉडल अपनाया था, यानी कंपनी ने जरूरत से कम अतिरिक्त पायलट रखे थे। जैसे ही नए नियम लागू हुए, जिसमें पायलटों को ज्यादा आराम देना अनिवार्य था, इंडिगो का ऑपरेटिंग मॉडल रात की ज्यादा उड़ानें भरने वाला अचानक काम करना बंद कर गया। सैकड़ों पायलट एक साथ अनिवार्य आराम अवधि में चले गए और इससे देश की 65 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी वाली इंडिगो की उड़ानें रद्द होने लगीं। इस वजह से न केवल इंडिगो, बल्कि पूरे देश की हवाई यात्रा व्यवस्था चरमरा गई।
देशभर में यात्रियों की मुश्किलें: मीटिंग्स से लेकर शादी तक प्रभावित- पिछले कुछ दिनों में इंडिगो के फैसलों ने लाखों यात्रियों की योजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। सिर्फ एक दिन में 2,300 में से 650 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो गईं। इससे कई लोग जरूरी बिजनेस मीटिंग्स से चूक गए, कुछ इंटरव्यू नहीं दे पाए, और कई अपनी शादी के रिसेप्शन तक नहीं पहुंच सके। मेडिकल इमरजेंसी में फंसे यात्रियों की भी शिकायतें आईं। चूंकि इंडिगो कुल घरेलू उड़ानों का दो-तिहाई हिस्सा संचालित करती है, बाकी एयरलाइंस अचानक बढ़े यात्रियों को संभाल नहीं पाईं। एयरपोर्ट पर लंबी कतारें, गुस्साए यात्री और बिखरे बैग आम दृश्य बन गए। कई यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद पता चला कि उनकी उड़ान रद्द हो चुकी है। इस स्थिति ने हवाई यात्रा को पूरी तरह अव्यवस्थित कर दिया और यात्रियों का भरोसा टूट गया।
DGCA के नए नियम और इंडिगो की तैयारी में चूक- यह संकट DGCA द्वारा लागू किए गए नए Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियमों से शुरू हुआ। इन नियमों का मकसद पायलटों की थकान कम करना और भारतीय एविएशन को वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाना था। नए नियमों के तहत पायलटों की साप्ताहिक आराम अवधि बढ़ाई गई, रात की उड़ानों की संख्या कम की गई, और लगातार रात की ड्यूटी पर रोक लगाई गई। इंडिगो ने इन बदलावों को गंभीरता से नहीं लिया और सही अनुमान नहीं लगाया कि उसे कितने अतिरिक्त पायलटों की जरूरत होगी। कंपनी के पास A320 फ्लीट के लिए जरूरी 2,422 कैप्टन की जगह सिर्फ 2,357 थे। पुराना मॉडल नई नियमावली में पूरी तरह फेल हो गया।
उड़ानें रुकने के बावजूद बुकिंग जारी: यात्रियों का गुस्सा- हालांकि इंडिगो की उड़ानें रद्द हो रही थीं, कंपनी ने नई बुकिंग लेना बंद नहीं किया। कई यात्रियों ने शिकायत की कि उन्होंने टिकट बुक किया, चेक-इन किया, और एयरपोर्ट पर घंटों इंतजार किया, लेकिन बाद में पता चला कि उनकी उड़ान रद्द हो चुकी है। इंडिगो ने दिनभर की रद्द उड़ानों की सूची भी जारी नहीं की, जिससे यात्रियों को खुद जाकर पता लगाना पड़ा कि उनकी उड़ान उड़ने वाली है या नहीं। छह दिनों तक वेबसाइट और ऐप पर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से यात्रियों में भ्रम और गुस्सा बढ़ा। कंपनी ने इसे अपनी “प्लानिंग गेप्स” और “गलत आकलन” बताया, लेकिन तब तक हजारों लोग प्रभावित हो चुके थे।
DGCA का दखल और सरकार की सख्ती: फेयर कैप लागू- बढ़ती नाराजगी के बीच DGCA ने इंडिगो को कुछ नियमों से अस्थायी छूट दी ताकि एयरलाइन अपनी रात की उड़ानें फिर से शुरू कर सके। यह छूट 10 फरवरी 2026 तक के लिए दी गई। DGCA ने इंडिगो मैनेजमेंट को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। दूसरी ओर, एयरफेयर आसमान छूने लगे। दिल्ली-बेंगलुरु जैसे रूट पर टिकट 40,000 से 80,000 रुपये तक पहुंच गए। इससे यात्रियों की नाराजगी और बढ़ी। स्थिति को गंभीर देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने किराए की ऊपरी सीमा लागू की ताकि एयरलाइंस मनमानी न कर सकें। सभी एयरलाइंस को सख्ती से निर्देश दिए गए कि वे तय कैप से ऊपर किराया न लगाएं।
इंडिगो की माफी और सुधार की योजना- आलोचनाओं के बाद इंडिगो ने 4 दिसंबर को आधिकारिक माफी जारी की। CEO पीटर एल्बर्स ने यात्रियों को भरोसा दिलाया कि कंपनी स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई कदम उठा रही है। एयरलाइन ने बताया कि 10 से 15 दिसंबर के बीच सामान्य संचालन बहाल कर देगी। यात्रियों के लिए रिफंड, कैंसलेशन और रीबुकिंग पर छूट, फंसे यात्रियों के लिए होटल और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था, एयरपोर्ट पर मुफ्त भोजन और सीनियर सिटीजन के लिए लाउंज एक्सेस जैसे राहत कदम उठाए गए। इंडिगो ने एक Crisis Management Group भी बनाया है जो रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसा संकट न हो।



