ईरान का सख्त रुख: ‘प्रतिरोध’ की राह पर अडिग, युद्ध खत्म होने की शर्तें साफ

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अब पीछे हटने वाला नहीं है। ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा है कि उनका देश हार मानने के बजाय मजबूती से मुकाबला करने की नीति पर कायम है। आइए विस्तार से जानते हैं ईरान के इस सख्त रुख और युद्ध खत्म होने की शर्तों के बारे में।
ईरान ने चुना ‘प्रतिरोध’ का रास्ता-ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान अब झुकने की बजाय ‘प्रतिरोध’ की राह पर चल रहा है। उनका मानना है कि हार मानने से बेहतर है मजबूती से मुकाबला करना। यह रुख ईरान की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वह अपनी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना चाहता है।
युद्ध खत्म होने की शर्तें क्या हैं?-फथाली ने स्पष्ट किया कि युद्ध कब खत्म होगा, यह पूरी तरह ईरान की शर्तों पर निर्भर करता है। उनका कहना है कि जब तक हमला करने वाला पक्ष अपनी आक्रामकता पूरी तरह बंद नहीं करता और भविष्य में ऐसे हमलों की गारंटी नहीं देता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। ईरान खुद को रक्षात्मक स्थिति में मानता है और केवल अपनी रक्षा कर रहा है।
भारत को भरोसेमंद मध्यस्थ बताया-ईरान ने भारत की भूमिका को इस मुद्दे में अहम माना है। राजदूत ने कहा कि भारत एक संतुलित और भरोसेमंद देश है, जो सभी पक्षों के साथ अच्छे संबंध रखता है। इसलिए भारत गलतफहमियां दूर करने और बातचीत का रास्ता खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह कूटनीतिक प्रयास तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और भारतीय जहाजों की सुरक्षा-Strait of Hormuz को लेकर उठ रही चिंताओं पर फथाली ने कहा कि यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के जहाजों को रोका जा रहा है। भारतीय जहाजों के मामले में कार्रवाई की जा रही है और कई जहाजों को सुरक्षित मार्ग भी दिया गया है, जिससे भारत की चिंता को कुछ हद तक कम किया गया है।
ट्रंप के दावों को ईरान ने किया खारिज-अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्ध खत्म करने की बातचीत के दावों को ईरान ने पूरी तरह नकार दिया है। राजदूत ने कहा कि फिलहाल अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है और ऐसे बयान केवल बाजार को प्रभावित करने के लिए दिए जा रहे हैं। यह बयान तनावपूर्ण माहौल को और बढ़ा सकते हैं।
कूटनीति के लिए ईरान की शर्तें-ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने व्यवहार में वास्तविक बदलाव नहीं लाता और ईरानी ठिकानों पर हमले बंद नहीं करता, तब तक बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर डटे हुए हैं और तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जिससे कूटनीतिक हल निकालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब ‘प्रतिरोध’ की नीति पर कायम है और युद्ध खत्म होने की शर्तें भी उसने साफ कर दी हैं। भारत को भरोसेमंद मध्यस्थ मानते हुए कूटनीति की उम्मीदें बनी हुई हैं, लेकिन फिलहाल तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। आने वाले समय में इस क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।



