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“जापान के पीएम शिगेरु इशिबा ने दिया इस्तीफा, सत्ताधारी पार्टी में बढ़ते विवाद के बीच बड़ा कदम”

जापान के पीएम इशिबा का चौंकाने वाला इस्तीफा: पार्टी में कलह और बाहरी दबाव का खेल!-जापान की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर हुआ है! प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के भीतर चल रहे गहरे मतभेदों और अंदरूनी कलह को शांत करने के लिए लिया गया है। सूत्रों और NHK की खबरों के अनुसार, इशिबा का यह कदम पार्टी को और टूटने से बचाने के लिए उठाया गया है। हालांकि उनका कार्यकाल अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ था, लेकिन पार्टी के अंदर लगातार चल रहे विवादों और पुराने घोटालों ने उनकी पकड़ को काफी कमजोर कर दिया था, जिसके चलते उन्हें यह कड़ा फैसला लेना पड़ा।

 अमेरिका-जापान व्यापार समझौते का असर-इशिबा का यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब कुछ ही दिन पहले जापान और अमेरिका के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण व्यापार समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत, जापान ने अमेरिकी परियोजनाओं में भारी-भरकम 550 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है। इस बड़े आर्थिक वादे और लगातार बढ़ती टैरिफ की बातचीत के बीच प्रधानमंत्री का इस्तीफा कई सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जापान पर पड़ रहे बाहरी आर्थिक दबावों को लेकर जो चिंताएं हैं, वे भी इस इस्तीफे के पीछे एक बड़ी वजह हो सकती हैं। जापान अपनी आर्थिक नीतियों को लेकर हमेशा सतर्क रहा है।

 घोटालों और हार ने हिला दी कुर्सी-इशिबा के लिए मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब 2023-24 के दौरान हुए स्लश फंड घोटाले ने पार्टी की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया। इस घोटाले का असर इतना बुरा हुआ कि LDP को कई चुनावों में लगातार हार का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से, अक्टूबर 2024 में प्रतिनिधि सभा और जुलाई 2025 में उच्च सदन में बहुमत खोना पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुआ। इस तरह लगातार गिरती लोकप्रियता ने इशिबा की स्थिति को और भी नाजुक बना दिया था, जिससे उनका बने रहना मुश्किल हो गया था।

 नए राजनीतिक दलों का उदय-इस राजनीतिक उथल-पुथल का फायदा देश के कुछ नए और छोटे राजनीतिक दल उठा रहे हैं। इनमें से एक प्रमुख दल है संसेइतो पार्टी, जो अपनी राष्ट्रवादी और आप्रवासन विरोधी नीतियों के लिए जानी जाती है। इस पार्टी ने जुलाई 2025 में हुए चुनावों में 14 नई सीटें जीतकर कुल 15 सीटों पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। इस तरह के दलों का बढ़ता प्रभाव सीधे तौर पर LDP की कमजोर होती पकड़ और घटती लोकप्रियता को दर्शाता है, जो आने वाले समय में जापान की राजनीति को और भी दिलचस्प बना सकता है।

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