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आंध्र प्रदेश के लिए खतरा: जिग्ना मोहन रेड्डी ने कर्नाटक के अल्मत्ती डैम विस्तार पर चंद्रबाबू नायडू पर साधा हमला

अल्मत्ती डैम का मुद्दा: जगन रेड्डी ने नायडू पर उठाये सवाल, क्या खतरे में है आंध्र प्रदेश का भविष्य?-आंध्र प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हलचल मची हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने मौजूदा मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जो अल्मत्ती डैम की ऊँचाई बढ़ाने की योजना से जुड़े हैं। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

कर्नाटक का फैसला: जल संग्रह क्षमता में भारी वृद्धि-हाल ही में, कर्नाटक कैबिनेट ने अल्मत्ती डैम की ऊँचाई 519 मीटर से बढ़ाकर 524.2 मीटर करने का फैसला किया है। इससे डैम की जल संग्रह क्षमता 280 TMC तक बढ़ जाएगी। इस परियोजना के लिए 70,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट भी मंजूर किया गया है। जगन मोहन रेड्डी का आरोप है कि मुख्यमंत्री नायडू राज्य के हितों की अनदेखी कर रहे हैं और इस फैसले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

जल संकट का खतरा: किसानों और पेयजल पर मंडराता संकट-जगन रेड्डी ने चेतावनी दी है कि अल्मत्ती डैम की ऊँचाई बढ़ने से आंध्र प्रदेश में सिंचाई और पेयजल पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। उनका कहना है कि कई क्षेत्र बिना पानी के बंजर हो सकते हैं, जिससे किसानों और आम लोगों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर नायडू राज्य के अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते, तो उन्हें मुख्यमंत्री क्यों रहना चाहिए?

इतिहास दोहराया जा रहा है? नायडू पर निष्क्रियता का आरोप-रेड्डी ने नायडू के 1995-2004 के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान भी कर्नाटक ने डैम का विस्तार किया था और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नजरअंदाज किया गया था। उनका आरोप है कि पिछले ढाई दशक से डैम की ऊँचाई बढ़ने की वजह से आंध्र प्रदेश सूखे के समय सिंचाई और पेयजल से वंचित रहा है। उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधा, जो नायडू को दिल्ली में प्रभावशाली दिखा रहे हैं, जबकि वे केंद्र पर दबाव डालने में विफल रहे हैं।

तत्काल कार्रवाई की मांग: KWDT-II में मजबूती से पैरवी-रेड्डी ने कहा कि नायडू के कार्यकाल में आंध्र प्रदेश की कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-II (KWDT-II) में प्रस्तुतियां कमजोर और प्रभावहीन रहीं। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व YSRCP सरकार ने अक्टूबर 2023 में राज्य के अधिकारों की सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन नायडू की सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। रेड्डी ने नायडू से तत्काल जागने, अपने सांसदों का उपयोग कर केंद्र पर दबाव बनाने, कर्नाटक के डैम विस्तार को रोकने और KWDT-II में मजबूती से तर्क प्रस्तुत करने की मांग की।

भविष्य की चेतावनी: आने वाली पीढ़ियों के लिए सबक-जगन रेड्डी ने चेतावनी दी है कि अगर नायडू राज्य के साथ इस तरह की विश्वासघात जारी रखते हैं, तो भविष्य की पीढ़ियां उन्हें एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में याद रखेंगी जिन्होंने अपने ही राज्य के हितों की रक्षा नहीं की। अब देखना यह है कि इस पूरे मामले पर टीडीपी (TDP) की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।

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