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12,915 करोड़ में JSW Paints का बड़ा दांव: Akzo Nobel India में खरीदेगी 75% हिस्सेदारी

 JSW पेंट्स का दबदबा: Akzo Nobel में बहुमत हिस्सेदारी की राह पर!-JSW समूह की पेंट इंडस्ट्री में अपनी पकड़ को और मजबूत करने की तैयारी है। कंपनी ने प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से Akzo Nobel India में बहुमत हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी मांगी है। यह सौदा लगभग 12,915 करोड़ रुपये का है, जिससे JSW Paints देश की चौथी सबसे बड़ी पेंट कंपनी बन सकती है।

 75% हिस्सेदारी और खुली पेशकश: एक बड़ी डील-JSW Paints पहले ही Akzo Nobel India की 74.76% हिस्सेदारी 8,986 करोड़ रुपये में खरीदने का ऐलान कर चुकी है। इसके बाद, बाकी 25% हिस्सेदारी के लिए 3,929.06 करोड़ रुपये की खुली पेशकश की जाएगी। यह सौदा JSW को पेंट बाजार में एक बड़ा खिलाड़ी बना देगा।

 CCI को क्या कहा गया?-JSW Paints और Akzo Nobel दोनों ने CCI को बताया है कि यह सौदा किसी भी बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित नहीं करेगा। इसलिए, बाजार को फिर से परिभाषित करने की आवश्यकता नहीं है।

 JSW समूह की विस्तार योजना-23 अरब डॉलर के JSW समूह ने स्टील, सीमेंट, ऊर्जा और ऑटोमोबाइल के बाद अब पेंट सेक्टर में भी अपनी जगह मजबूत करने की योजना बनाई है। यह अधिग्रहण इसी रणनीति का हिस्सा है।

 Akzo Nobel और JSW का समझौता-जून में, नीदरलैंड की कंपनी Akzo Nobel NV ने अपनी भारतीय इकाई में हिस्सेदारी JSW Group को बेचने की घोषणा की थी। हालांकि, Akzo Nobel का India Powder Coatings बिजनेस और रिसर्च सेंटर उसके पास ही रहेगा।

 सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश-JSW Paints, JTPM Metal Traders और JSW EduInfra मिलकर बाकी 25.24% हिस्सेदारी के लिए 3,929.06 करोड़ रुपये की खुली पेशकश करेंगे। यह सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए एक अच्छा मौका होगा।

पेंट सेक्टर में JSW की तेज़ रफ़्तार-2019 में पेंट बाजार में कदम रखने वाली JSW Paints के MD पार्थ जिंदल का कहना है कि पेंट और कोटिंग्स का भारतीय बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है और Akzo Nobel जैसे ब्रांड को शामिल करके वे भविष्य की पेंट कंपनी बनाना चाहते हैं।

 भारत का पेंट उद्योग: मौजूदा स्थिति-भारतीय पेंट उद्योग में Asian Paints सबसे आगे है, लेकिन Berger, Kansai Nerolac, Indigo Paints, Shalimar Paints और Nippon Paints जैसे ब्रांड भी मज़बूत हैं। Akzo Nobel ने FY25 में 4,091 करोड़ रुपये का कारोबार किया था।

भविष्य के बदलाव-अक्टूबर 2024 में, Akzo Nobel ने अपने साउथ एशिया पोर्टफोलियो की रणनीतिक समीक्षा शुरू की थी। कंपनी कोर कोटिंग बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए साझेदारी, जॉइंट वेंचर या हिस्सेदारी बेचने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।

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