पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस का खतरा: जानिए पूरी कहानी और सावधानियां

पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में कोरोना का डर अभी कम भी नहीं हुआ था कि एक और गंभीर संक्रमण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 25 साल बाद राज्य में निपाह वायरस के संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जो बेहद खतरनाक माना जाता है। इस वायरस की मृत्यु दर 40 से 70 प्रतिशत तक हो सकती है, यानी संक्रमितों में से कई की जान जाने का खतरा रहता है। हाल ही में दो स्वास्थ्यकर्मी गंभीर रूप से बीमार हुए हैं, जिससे पूरे स्वास्थ्य तंत्र में अलर्ट जारी हो गया है।
निपाह वायरस का मामला: बारासात के अस्पताल से शुरू हुआ अलर्ट-उत्तर 24 परगना जिले के बारासात इलाके के एक निजी अस्पताल में दो नर्सों की तबीयत अचानक बिगड़ी। तेज बुखार, कमजोरी और दिमाग से जुड़ी समस्याओं के साथ उनकी हालत गंभीर हो गई। डॉक्टरों ने निपाह वायरस की आशंका जताई और तुरंत सैंपल जांच के लिए भेजे। अस्पताल प्रशासन ने पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
दोनों नर्सों की ट्रैवल हिस्ट्री और संक्रमण का शक-जानकारी मिली है कि दोनों नर्स दिसंबर में अपने-अपने गांव गए थे, जो पूर्वी मिदनापुर और पूर्व बर्धमान जिले में हैं। वहां से लौटने के बाद उनकी तबीयत खराब हुई। स्वास्थ्य विभाग को शक है कि संक्रमण की शुरुआत वहीं हुई होगी। अब उन इलाकों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है और जांच की जा रही है कि कहीं और भी ऐसे लक्षण तो नहीं दिखे।
सरकारी अपडेट: जांच और आइसोलेशन की प्रक्रिया-डॉक्टरों ने लक्षणों के आधार पर निपाह वायरस की संभावना जताई है, लेकिन अंतिम पुष्टि पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की रिपोर्ट से होगी। दोनों मरीजों के सैंपल वहां भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने तक उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है और जिन लोगों का उनके संपर्क में आना-जाना था, उनकी पहचान कर जांच शुरू कर दी गई है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति-मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने ममता बनर्जी से बात कर स्थिति की जानकारी ली। केंद्र सरकार ने हर संभव तकनीकी और मेडिकल सहायता का भरोसा दिया है। नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम को बंगाल भेजा गया है। राज्य की मुख्य सचिव ने कहा कि संपर्क ट्रेसिंग तेजी से हो रही है और तीन जिलों के स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है।
निपाह वायरस का इतिहास और पश्चिम बंगाल में पिछली घटनाएं-निपाह वायरस पहली बार 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सामने आया था। उस वक्त 66 संक्रमितों में से 45 की मौत हो गई थी। इसलिए निपाह का नाम सुनते ही स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो जाती हैं। कोरोना की तुलना में निपाह की मृत्यु दर कई गुना ज्यादा है, इसलिए इसे गंभीरता से लेना जरूरी है।
निपाह वायरस कैसे फैलता है और क्यों है खतरनाक?-यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों में पाया जाता है। जब ये चमगादड़ फलों या खजूर के रस को दूषित करते हैं, तो वायरस इंसानों तक पहुंच सकता है। संक्रमित जानवरों के संपर्क से भी खतरा रहता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह वायरस इंसान से इंसान में भी फैल सकता है, खासकर शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के जरिए। इसलिए अस्पतालों में कड़ी सावधानी बरती जा रही है।
निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण और सावधानियां-शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, चक्कर आना और मानसिक भ्रम। अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया गया तो बाद में दिमाग में सूजन, सांस लेने में दिक्कत और कोमा तक हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं और खुद से इलाज करने की गलती न करें।
निपाह से बचाव के लिए जरूरी कदम-जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आती, सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है। जमीन पर गिरे फल या आधे कटे फल खाने से बचें। कच्चे खजूर का रस पीने से बचें क्योंकि चमगादड़ इसे दूषित कर सकते हैं। हाथों की सफाई पर ध्यान दें, साबुन से बार-बार हाथ धोएं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सावधानी बरतें। अगर किसी को तेज बुखार या अजीब लक्षण हों, तो उसे छुपाने की बजाय तुरंत जांच कराएं।



