
टाइगर रिजर्व में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, लाखों की सागौन लकड़ी जब्त-छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग और गरियाबंद पुलिस ने मिलकर अवैध सागौन तस्करी और वन्यजीव शिकार के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में सागौन लकड़ी, फर्नीचर और शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए। यह कार्रवाई क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है। ओडिशा सीमा से लगे गांवों में चलाए गए इस अभियान ने वन माफियाओं और शिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। मामले की जांच तेज कर दी गई है।
गुप्त सूचना पर गांव में छापेमारी-वन विभाग को लंबे समय से दक्षिण उदंती क्षेत्र के कुछ गांवों में अवैध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसी आधार पर 5 जून को ओडिशा सीमा के पास साहेबिनकछार गांव में विशेष अभियान चलाया गया। उपनिदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की टीम ने कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान राष्ट्रीयकृत सागौन लकड़ी से बने फर्नीचर और अन्य सामग्री मिली, जिससे पूरे इलाके में सघन जांच शुरू हो गई।
कार्रवाई की भनक लगते ही छिपाने की कोशिश-जांच में पता चला कि आरोपियों को कार्रवाई की पहले से खबर थी। इसलिए उन्होंने अवैध लकड़ी और अन्य सामान छिपाने के लिए कई तरीके अपनाए। कुछ ने गहरे गड्ढे खोदकर लकड़ी दबा दी, तो कुछ ने सागौन के स्लीपर और सामान को तालाबों में छिपा दिया। वन विभाग की टीम ने इन जगहों की सावधानी से जांच कर छिपी हुई सामग्री बरामद की।
लाखों की सागौन लकड़ी और फर्नीचर जब्त-इस अभियान में कुल 193 सागौन स्लीपर, 2.4523 घन मीटर सागौन लकड़ी और 2.114 घन मीटर अतिरिक्त लकड़ी बरामद हुई। कुल 4.56 घन मीटर अवैध लकड़ी जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग 6 लाख रुपये आंकी गई है। बरामद सामग्री में अवैध सागौन से बने फर्नीचर भी शामिल हैं। यह कार्रवाई वन संपदा की सुरक्षा में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
स्निफर डॉग ‘टीना’ ने खोले कई राज-इस अभियान में स्निफर डॉग ‘टीना’ की भूमिका अहम रही। लकड़ी को छिपाने के कारण सामान्य जांच में पता लगाना मुश्किल था, लेकिन टीना ने तालाब, गड्ढे और बाड़ियों में छिपी लकड़ी का सटीक पता लगाया। अधिकारियों ने कहा कि टीना की मदद के बिना कई सबूत छूट सकते थे, इसलिए उसकी भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वन्यजीव शिकार से जुड़े उपकरण भी मिले-सिर्फ लकड़ी तस्करी ही नहीं, बल्कि वन्यजीव शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद हुए। चार आरोपियों के पास से अवैध सागौन लकड़ी मिली, जबकि तीन अन्य के कब्जे से जाल, पोटाश बम और अन्य खतरनाक उपकरण जब्त किए गए। ये उपकरण वन्यजीवों के शिकार के लिए उपयोग किए जाते थे, जो क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा हैं।
आरा मशीन और बड़े हाथ आरे भी जब्त-जांच में वन विभाग को लकड़ी काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी मिले। एक पेट्रोल चालित आरा मशीन और तीन बड़े हाथ आरे जब्त किए गए। अधिकारियों के अनुसार इन मशीनों से अवैध कटाई संगठित तरीके से हो रही थी। विभाग अब यह पता लगाने में लगा है कि इस नेटवर्क से और कौन जुड़े हैं और लकड़ी की सप्लाई कहां तक जाती है।
पहले भी हो चुकी है तस्करी की घटनाएं-उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व और आसपास के इलाकों में पहले भी सागौन तस्करी के कई मामले सामने आ चुके हैं। तस्कर उदंती नदी का इस्तेमाल कर लकड़ी पहुंचाते पकड़े गए थे। वन विभाग लंबे समय से इन गतिविधियों पर नजर रख रहा है, लेकिन तस्कर नए तरीके अपनाकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं। इस बार की कार्रवाई ने विभाग की सख्ती को दिखाया है।
वन माफियाओं को कड़ा संदेश-वन विभाग और पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई को वन माफियाओं और शिकारियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि अवैध कटाई, तस्करी और शिकार में शामिल किसी को नहीं बख्शा जाएगा। जांच जारी है और जल्द ही और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है। विभाग जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार ऐसे अभियान चलाता रहेगा।



