मराठा आरक्षण आंदोलन: आज़ाद मैदान से लेकर CSMT स्टेशन तक आंदोलन का बदलता रंग

मराठा आरक्षण आंदोलन: आज़ाद मैदान में जोश, मुंबई में हलचल!
मनोज जरांगे का अनशन और मराठा समाज का हुजूम-मुंबई का आज़ाद मैदान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटील यहाँ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में 10% आरक्षण मिले। इस मांग के समर्थन में महाराष्ट्र के कोने-कोने से हज़ारों की संख्या में लोग मुंबई पहुंचे हैं। यह आंदोलन अब सिर्फ एक व्यक्ति या एक मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे मराठा समाज की एकजुटता का प्रतीक बन गया है। हर शाम, राज्य के विभिन्न हिस्सों से भोजन के वाहन आते हैं, जिन्हें प्रदर्शनकारी आपस में बांटते हैं और राहगीरों को भी देते हैं। यह दृश्य समाज की एकता और आपसी सहयोग को दर्शाता है, भले ही इसके कारण शहर में लोगों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ रहा हो।
खेल-कूद और मनोरंजन: आंदोलन में जोश भरने का नया तरीका-आज़ाद मैदान और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के आसपास का माहौल प्रदर्शनकारियों के लिए सिर्फ विरोध प्रदर्शन का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह मनोरंजन और खेल का केंद्र भी बन गया है। हजारों की भीड़ को व्यस्त रखने और उनका जोश बनाए रखने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। यहाँ कबड्डी, खो-खो और कुश्ती जैसे पारंपरिक खेल खेले जा रहे हैं, तो वहीं सड़कों पर क्रिकेट का भी आनंद लिया जा रहा है। इन खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों का उद्देश्य केवल समय बिताना नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे का हौसला बढ़ाने और आंदोलन को एक सकारात्मक ऊर्जा देने का जरिया भी है। यह दिखाता है कि कैसे विरोध प्रदर्शनों में भी लोग अपनी जीवंतता और एकता बनाए रख सकते हैं।
सड़कों पर जाम और गंदगी: BMC और पुलिस के लिए सिरदर्द-प्रदर्शनकारियों की भारी संख्या के कारण मुंबई की सड़कों पर, खासकर CSMT के आसपास, यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। “एक मराठा, लाख मराठा” और “आरक्षण आमचा हक्काचा” जैसे नारों के साथ नाचते-गाते प्रदर्शनकारियों ने हिंदी और मराठी गानों पर खूब धूम मचाई। इस उत्साह के बीच, कुछ प्रदर्शनकारी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की ओर बढ़ने लगे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक लिया। रेलवे ट्रैक पर उतरे युवकों को भी रेलवे पुलिस ने समझाया-बुझाया। इस दौरान, कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा बचा हुआ खाना, पानी की बोतलें और अन्य कचरा सड़क, स्टेशन प्लेटफॉर्म और ट्रैक पर फेंकने से सफाई व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन गई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने लगभग 1000 सफाईकर्मी और 400 शौचालय तैनात किए हैं, फिर भी गंदगी की समस्या बनी हुई है।
व्यवस्था बनाए रखने की कोशिशें और जागरूकता-हालांकि, यह कहना गलत होगा कि सभी प्रदर्शनकारी अव्यवस्था फैला रहे हैं। पुणे जिले के अंबेगांव से आए एक समूह को स्टेशन परिसर की सफाई करते हुए देखा गया। यह दर्शाता है कि आंदोलन में शामिल लोग भी व्यवस्था बनाए रखने के महत्व को समझते हैं और अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह एक सराहनीय कदम है जो आंदोलन की गंभीरता और उसमें शामिल लोगों की जागरूकता को दिखाता है। ऐसे प्रयास यह सुनिश्चित करते हैं कि आंदोलन का संदेश सही तरीके से पहुंचे और शहर को अनावश्यक नुकसान न हो। यह उदाहरण दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।



