मुंबई के आज़ाद मैदान में मराठा आरक्षण आंदोलन: बारिश और मुश्किल हालात में भी डटे प्रदर्शनकारी

बारिश में भी डटे मराठा, आरक्षण के लिए मुंबई में हल्ला बोल!
आज़ाद मैदान में जनसैलाब, मांग है हक की!- मुंबई का आज़ाद मैदान आजकल एक अलग ही रंगत में है। जहाँ देखो, वहीं मराठा समाज के लोग अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। इनकी सीधी सी मांग है कि इन्हें भी ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में शामिल किया जाए और 10 फीसदी आरक्षण दिया जाए। इस आंदोलन की कमान संभाले हुए हैं मनोज जरांगे, जो शुक्रवार से अनशन पर बैठे हैं। भले ही आसमान से पानी बरस रहा हो और मैदान में कीचड़ ही कीचड़ हो गया हो, लेकिन इन लोगों का जोश कम नहीं हुआ है। दूर-दूर से लोग ट्रेन और बस पकड़कर मुंबई आए हैं। रहने-खाने की दिक्कतें तो हैं, लेकिन इन्हें परवाह नहीं। ये सब यहीं डटे हुए हैं, और भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है। इनका कहना है कि जब तक इनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, ये हिलने वाले नहीं, चाहे मौसम कैसा भी हो।
खाने-पीने की दिक्कत, पर हौसला बुलंद!- आंदोलन में आए कई लोगों ने बताया कि आसपास की दुकानें बंद करवा दी गई हैं, जिससे खाने-पीने का सामान मिलना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ के लिए सरकार ने कोई खास इंतज़ाम नहीं किया है। खासकर महिलाएं और बुजुर्ग इस कीचड़ और बारिश में ज्यादा परेशान हैं, उन्हें साफ-सफाई और सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। रात भर की बारिश के बाद तो मैदान में पानी भर गया, जिससे लोग सड़कों पर और रेलवे स्टेशन के पास जमा होने लगे। इसकी वजह से घंटों तक ट्रैफिक भी जाम रहा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार उनकी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही है और जानबूझकर सुविधाएं कम रखी गई हैं। लेकिन लोगों का जोश देखकर लगता है कि वे हर मुश्किल झेलने को तैयार हैं, बस उनका आरक्षण का हक मिलना चाहिए।
बीएमसी का दावा: सब व्यवस्था है, पर लोगों की मानें तो…?- वहीं, मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों की सुविधा के लिए सारे इंतजाम कर दिए हैं। बीएमसी के मुताबिक, आज़ाद मैदान और आसपास के सभी टॉयलेट्स को मुफ्त कर दिया गया है। मैदान के अंदर 29 नए टॉयलेट बनाए गए हैं, सड़क पर मोबाइल टॉयलेट यूनिट्स लगी हैं और मेट्रो साइट के पास भी पोर्टेबल टॉयलेट लगाए गए हैं। बारिश के कारण जो कीचड़ और पानी भरा था, उसे ठीक करने के लिए रास्तों पर बजरी भी डाली गई है। लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ के लिए ये सब इंतज़ाम काफी नहीं हैं। उनका मानना है कि अगर यह आंदोलन लंबा चला, तो सरकार को और बेहतर इंतजाम करने होंगे ताकि लाखों लोगों की सेहत और सुरक्षा पर कोई आंच न आए।



