हज़रतबल विवाद पर बोलीं महबूबा मुफ्ती, AAP विधायक को बलि का बकरा बनाने का आरोप

हज़रतबल विवाद: महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर उठाए गंभीर सवाल, क्या है पूरा मामला?-जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में हज़रतबल प्रतीक विवाद को लेकर सरकार पर तीखे सवाल दागे हैं। उनका मानना है कि इस घटना ने न केवल लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, बल्कि सरकार ने असली दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय, विरोध प्रदर्शन करने वाले आम लोगों पर ही केस दर्ज कर दिया। महबूबा का आरोप है कि इस पूरे मामले से ध्यान भटकाने के लिए डोडा के विधायक मेहराज मलिक को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, ताकि असली मुद्दे से पर्दा न उठ सके।
विधायक पर PSA लगाना एक गलत कदम-महबूबा मुफ्ती ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भले ही डोडा के आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज मलिक ने कुछ आपत्तिजनक या तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया हो, लेकिन उनके खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कार्रवाई करना बिल्कुल गलत है। उनका मानना है कि एक चुने हुए जन प्रतिनिधि को इस तरह जेल में डालना स्थिति को और भी बिगाड़ सकता है। महबूबा के अनुसार, हज़रतबल की घटना मुख्य मुद्दा है और सरकार इस बड़े मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ही विधायक पर यह कड़ी कार्रवाई कर रही है, जो कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला है।
डोडा में तबाही के बावजूद राहत पर ध्यान क्यों नहीं?-महबूबा मुफ्ती ने डोडा जिले में हाल ही में हुई भारी बारिश और उसके कारण हुई तबाही का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मुश्किल समय में प्रशासन की पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता प्रभावित लोगों के लिए राहत और पुनर्वास कार्य होना चाहिए था। लेकिन सरकार राहत पहुंचाने के बजाय, विधायक को हिरासत में लेकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। महबूबा ने सवाल उठाया कि क्या यही ‘कानून का राज’ है, जहाँ अपनी आवाज़ उठाने वाले जन प्रतिनिधियों को जेल में डाल दिया जाता है, जबकि असल समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
उपराज्यपाल से सीधी अपील: FIR वापस हो, विधायक रिहा हों-महबूबा मुफ्ती ने सीधे तौर पर उपराज्यपाल से यह अपील की है कि हज़रतबल मामले में दर्ज की गई FIR को तुरंत वापस लिया जाए और विधायक मेहराज मलिक को भी बिना किसी देरी के रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता द्वारा इस्तेमाल किए गए गलत शब्दों का जवाब जेल या PSA जैसी सख्त कार्रवाई नहीं हो सकती। महबूबा का मानना है कि अगर सरकार जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश करेगी, तो इससे हालात और भी बदतर हो सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सख्ती से माहौल ठीक नहीं होगा, बल्कि आपसी बातचीत और संवेदनशीलता से ही इस समस्या का हल निकाला जा सकता है।
कश्मीर की स्थिति और पड़ोसियों से तुलना: एक चेतावनी-महबूबा मुफ्ती ने एक गंभीर चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि अगर कश्मीर में लोगों की आवाज़ को लगातार दबाया जाता रहा, तो यहां के हालात और भी बिगड़ सकते हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसे देशों में देखी जा रही अस्थिरता का ज़िक्र किया और कहा कि डोडा जैसे इलाकों में भी वैसी ही स्थिति पैदा हो सकती है। महबूबा ने उपराज्यपाल से आग्रह किया कि वे ज़मीनी हकीकत को समझें और उसी के अनुसार फैसले लें। FIR वापस लेने और विधायक की रिहाई से ही कश्मीर में माहौल को सामान्य और बेहतर बनाया जा सकता है।



