तालाब के किनारे बारूद! सक्ती के छितापंडरिया गांव में खनन माफिया ने फैलाई दहशत

छत्तीसगढ़ का गांव बना बारूद का अड्डा: डर और अन्याय की कहानी
धमाकों की आवाज़ ने चुराया गांव का सुकून-छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के छितापंडरिया गांव में इन दिनों जीना मुश्किल हो गया है। खनन माफियाओं की वजह से गांव में हर तरफ बारूद फैला हुआ है। दिन-रात ब्लास्टिंग की आवाज़ गूंजती रहती है, जिससे गांव वालों में दहशत का माहौल है। बच्चे, बूढ़े, जवान सब डरे हुए हैं। खुलेआम हो रहे विस्फोटों पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है, और गांव की शांति पूरी तरह से चकनाचूर हो गई है।
तालाब बना बम का गोदाम: सरपंच पर उठ रहे सवाल-गांव के तालाब के आसपास बड़ी मात्रा में बारूद और तार बिछे हुए हैं। हर वक्त ब्लास्टिंग का डर सता रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच खनन माफियाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है। तालाब को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है, और सरपंच इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। ग्रामीणों को डर है कि ये खनन उनके जीवन के लिए खतरा बन सकता है, और सरपंच की इस चुप्पी से उनकी मिलीभगत साफ झलकती है।
प्रशासन की अनदेखी: क्या है मिलीभगत?-इस गंभीर मामले में प्रशासन की अनदेखी चौंकाने वाली है। न तो पंचायत ने कुछ कहा, और न ही खनिज विभाग को इस बारे में सूचित किया गया। गांव में धमाके हो रहे हैं, तालाब खोदा जा रहा है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से बेखबर बना हुआ है। ऐसा लगता है कि इस पूरे मामले में कहीं न कहीं मिलीभगत है, और गांव की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है।
कलेक्टर का एक्शन: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई?-जब मामला प्रशासन तक पहुंचा, तो कलेक्टर ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही। लेकिन क्या यह भरोसा कायम रहेगा, यह देखना बाकी है। क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
रसूखदारों का हाथ?: सवालों का अंबार-गांव में हो रही ये घटनाएं बिना किसी रसूखदार के समर्थन के संभव नहीं हैं। सवाल उठता है कि क्या कोई बड़ा नेता या अधिकारी इस खनन रैकेट के पीछे है? इतने बड़े पैमाने पर बारूद और मशीनों की व्यवस्था बिना किसी राजनीतिक या आर्थिक ताकत के नहीं हो सकती।
बारूद की सप्लाई: ‘सोनी’ नाम का रहस्य-बारूद की सप्लाई “सोनी” नाम के व्यक्ति द्वारा की जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री गांव तक कैसे पहुंची, यह एक बड़ा सवाल है। क्या इसमें किसी सप्लायर या कंपनी की मिलीभगत है? और क्या इसकी जांच होगी?
पत्थरों का अचानक गायब होना: कहाँ गए सैकड़ों ट्रक पत्थर?-पिछले हफ्ते बड़े स्तर पर ब्लास्टिंग के बाद सैकड़ों ट्रकों में पत्थर किसी क्रशर प्लांट की ओर रवाना कर दिए गए। अब सवाल है कि वो पत्थर कहां गए और क्या उस पर कोई कार्रवाई होगी? क्या क्रशर प्लांट की भूमिका की भी जांच होगी?
ग्रामीणों की उम्मीद: शांति की वापसी-ग्रामीणों की उम्मीद अब प्रशासन पर टिकी है कि वो उनके गांव की शांति वापस दिलाएगा। लेकिन क्या प्रशासन उनकी उम्मीदों पर खरा उतरेगा, यह देखना बाकी है।



