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ईरान संकट के बीच राहत की खबर: भारत के पास 6–8 हफ्तों का तेल भंडार, सरकार हर घंटे कर रही निगरानी

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा: छह से आठ हफ्तों का तेल भंडार, सरकार सतर्क-पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के लिए फिलहाल राहत की खबर आई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक देश के पास इतना कच्चा तेल और पेट्रोल-डीजल का भंडार है कि घरेलू जरूरतें छह से आठ हफ्तों तक पूरी की जा सकती हैं। हालांकि सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर स्थिति के लिए तैयार है।

होरमुज जलडमरूमध्य पर संकट, भारत की तैयारी मजबूत-भारत के करीब आधे कच्चे तेल और एलपीजी का आयात होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते होता है। हाल ही में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग को लेकर चेतावनी दी है, जिससे टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। तेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि सरकार रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रही है और अगर संकट एक-दो हफ्ते भी चलता है तो देश के पास पर्याप्त तैयारी है।

25 दिन का कच्चा तेल और उतना ही तैयार ईंधन उपलब्ध-सूत्रों के अनुसार, भारत के पास करीब 25 दिनों का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा रिफाइनरियों, डिपो, पाइपलाइनों और अन्य भंडारण केंद्रों में पेट्रोल, डीजल और एटीएफ का भी लगभग उतना ही स्टॉक मौजूद है। साथ ही भूमिगत रणनीतिक भंडार भी हैं, जिन्हें आपातकाल में इस्तेमाल किया जा सकता है।

रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक सप्लाई का सहारा-मंगलुरु, पाडुर और विशाखापत्तनम में बने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मिलाकर भारत के पास करीब 100 मिलियन बैरल का स्टॉक है। सरकार ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका, रूस, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से भी आयात बढ़ाया जा सकता है। पिछले कुछ सालों में भारत ने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाया है ताकि किसी एक मार्ग पर पूरी निर्भरता न रहे।

कीमतों पर असर और महंगाई का खतरा-हालांकि सप्लाई में फिलहाल कोई बड़ा संकट नहीं दिख रहा, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव आ सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे, जबकि चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में ही 100 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हो चुका है।

एलपीजी सप्लाई पर भी नजर, नए स्रोत तलाशे जा रहे हैं-सरकारी अधिकारी ने बताया कि ईरान संकट से पहले ही सऊदी अरब की पाइपलाइन में दिक्कत के कारण करीब 1.2 लाख टन एलपीजी की कमी हो गई थी। अब भारत अन्य उत्पादकों से सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि घरेलू जरूरतें पूरी हो सकें।

ऊर्जा सुरक्षा अब सबसे बड़ा मुद्दा-दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक के रूप में भारत के लिए यह संकट ऊर्जा सुरक्षा की अहमियत को फिर से उजागर करता है। अगर होरमुज मार्ग लंबी अवधि के लिए बंद होता है तो वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाना जरूरी होगा। फिलहाल सरकार का मानना है कि स्टॉक और रणनीतिक भंडार की वजह से देश अल्पकालिक संकट से निपटने में सक्षम है, लेकिन कीमतों का असर आम लोगों तक जरूर पहुंचेगा।

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत रखा है। पर्याप्त तेल भंडार और वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों के कारण देश किसी भी अल्पकालिक संकट का सामना कर सकता है। हालांकि बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ावा दे सकती हैं, इसलिए सरकार सतर्कता से स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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