फाहलगाम हमले को लेकर पाक का दावा- “आतंकी नेटवर्क खत्म कर चुके हैं”, लश्कर से जुड़ाव से किया इनकार

पाकिस्तान का दावा: क्या वाकई खत्म हुआ आतंकवाद?-पाकिस्तान ने एक बड़ा दावा किया है – उसने देश में मौजूद सभी आतंकवादी संगठनों का सफाया कर दिया है! लेकिन क्या ये सच है? आइए जानते हैं इस दावे की सच्चाई क्या है।
अमेरिका का कड़ा रुख: TRF पर प्रतिबंध-अमेरिका ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। माना जा रहा है कि TRF, लश्कर-ए-तैयबा की ही एक शाखा है। यह कदम फाहलगाम हमले के बाद उठाया गया है, जिसकी जिम्मेदारी पहले TRF ने ली थी, लेकिन बाद में इनकार कर दिया। इससे भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका का ये कदम पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती है।
TRF का यू-टर्न: भरोसे की कमी-TRF ने पहले फाहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली, लेकिन बाद में इस बात से मुकर गया। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और बढ़ गई है। यह घटना दर्शाती है कि क्षेत्र में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं है। इस घटनाक्रम से क्षेत्रीय स्थिरता पर भी सवाल उठते हैं।
पाकिस्तान का पक्ष: जीरो टॉलरेंस की बात-पाकिस्तान का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा पर पहले से ही प्रतिबंध है और वो निष्क्रिय है। उनका दावा है कि लश्कर से जुड़े सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और आतंकवाद के खिलाफ उनकी नीति जीरो टॉलरेंस है। लेकिन, TRF की गतिविधियाँ और अमेरिका का कदम पाकिस्तान के दावों पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव: सच्चाई की तलाश-अमेरिका के कदम और TRF की पहचान ने पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को कैसे साबित करता है। यह मामला क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।
अनिश्चितता का माहौल-फाहलगाम हमले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। लेकिन TRF और लश्कर के नाम सामने आने से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते और बिगड़ गए हैं। भविष्य में दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शिता और सहयोग बहुत ज़रूरी है। इस घटनाक्रम से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।



