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TASMAC घोटाले की जांच पर बोले पलानीस्वामी – ‘बिना आग के धुआं नहीं उठता’, उठाए सरकार पर सवाल

तमिलनाडु की सियासत में गरमाहट: पलानीस्वामी बनाम स्टालिन-तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विवाद शुरू हो गया है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK नेता पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री स्टालिन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस विवाद के केंद्र में है TASMAC घोटाला और NITI आयोग की बैठक में स्टालिन की उपस्थिति।

 TASMAC घोटाला: 10 रुपये का खेल?-पलानीस्वामी का कहना है कि TASMAC शराब की दुकानों पर हर बोतल पर 10 रुपये ज़्यादा वसूले जा रहे हैं। उनका दावा है कि यह एक खुला राज़ है और एक उपभोक्ता संगठन के प्रमुख ने भी इस बात की पुष्टि की है। पुलिस और ED की जाँच चल रही है, और पलानीस्वामी का मानना है कि निष्पक्ष जाँच ही सच्चाई सामने ला सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के चलते उन्होंने इस बारे में ज़्यादा कुछ नहीं कहा। यह मामला बेहद गंभीर है और जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

 NITI आयोग की बैठक: राजनीति या राज्य का भला?-तीन साल बाद स्टालिन के NITI आयोग की बैठक में शामिल होने पर भी पलानीस्वामी ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्टालिन ED की जाँच से बचने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। पलानीस्वामी का मानना है कि स्टालिन राज्य के विकास के बजाय राजनीति में ज़्यादा व्यस्त हैं, जिससे राज्य को कई महत्वपूर्ण योजनाओं और धन से वंचित होना पड़ रहा है। यह आरोप राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है और राज्य के विकास पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्टालिन का पलटवार: राज्य के हितों की बात-मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया पर पलानीस्वामी के आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि वह NITI आयोग की बैठक में तमिलनाडु के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए गए थे। उन्होंने केंद्र से राज्य को अधिक टैक्स शेयर और विकास योजनाओं के लिए धन की मांग की। साथ ही, उन्होंने कावेरी, वैगई और थामीरबारानी नदियों के लिए विशेष परियोजनाओं की भी मांग की। स्टालिन के इस जवाब से यह विवाद और भी गहरा हो गया है और दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है।

आगे क्या?-यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा विवाद बन गया है। पलानीस्वामी के गंभीर आरोप और स्टालिन का जवाब इस बात का संकेत देते हैं कि आने वाले समय में इस मामले पर और भी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। जांच एजेंसियों की भूमिका और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस मामले के भविष्य को तय करेगा।

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