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तीसरी बार भी कमान संभालेंगे Pinarayi Vijayan? CPM ने नियमों में दी छूट, केरल चुनाव से पहले बड़ा फैसला

केरल चुनाव 2026: पिनराई विजयन फिर से LDF के नेतृत्व में, CPM ने दी बड़ी छूट-केरल की राजनीति में बड़ा संकेत मिला है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने साफ कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन ही लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के चेहरे होंगे। पार्टी ने नियमों में छूट देते हुए उन्हें तीसरी बार नेतृत्व की अनुमति दी है, जो चुनावी रणनीति में अहम बदलाव है।

दो कार्यकाल और उम्र सीमा के नियम में छूट-CPM के नियमों के मुताबिक कोई भी विधायक लगातार दो बार से ज्यादा उम्मीदवार नहीं बन सकता और 75 वर्ष की उम्र के बाद पद पर बने रहने की सीमा होती है। लेकिन पिनराई विजयन के मामले में पार्टी ने इन दोनों नियमों में छूट दी है। यह फैसला पार्टी की रणनीति को तेज करेगा और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को आसान बनाएगा।

केरल में CPM की सत्ता और चुनाव की अहमियत-केरल ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां CPM की सरकार है। इसलिए आगामी चुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के स्थानीय निकाय चुनावों में LDF का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, इसलिए पार्टी मजबूत उम्मीदवारों को मौका देकर सत्ता बरकरार रखना चाहती है।

छह बार विधायक पिनराई विजयन का फिर से मैदान में आना-पिनराई विजयन पहली बार 1970 में विधायक बने थे और अब तक छह बार विधानसभा पहुंचे हैं। कन्नूर जिला उनका मजबूत गढ़ माना जाता है। पिछले दो चुनावों में उन्होंने धर्मदम सीट से जीत हासिल की थी। 80 साल की उम्र में भी वे धर्मदम से ही चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।

केके शैलजा को लेकर पार्टी में उठ रही हलचल-पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा को लगातार तीसरी बार टिकट न देने की चर्चा पार्टी में असंतोष बढ़ा रही है। 2021 में उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी और मुख्यमंत्री पद की संभावित उम्मीदवार मानी जाती थीं। अब पार्टी उन्हें मट्टनूर की बजाय पेरावूर सीट से चुनाव लड़ने को कह सकती है।

चुनावी रणनीति और समीकरणों पर सबकी नजर-CPM इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी ने मजबूत और भरोसेमंद चेहरों को आगे रखकर चुनावी रणनीति बनाई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पिनराई विजयन की अगुवाई में LDF तीसरी बार सत्ता में वापसी कर पाता है या केरल की राजनीति में नया मोड़ आता है।

यह चुनाव केरल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होगा, जहां अनुभव और रणनीति दोनों की अहम भूमिका होगी। पार्टी की यह रणनीति दर्शाती है कि वे सत्ता बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं।

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