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भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी पर असम पहुंचे पीएम मोदी, जारी करेंगे 100 रुपये का खास सिक्का

असम में पीएम मोदी का खास दौरा: भारत रत्न भूपेन हजारिका को अनोखी श्रद्धांजलि!

एक ऐतिहासिक पल की ओर असम: पीएम मोदी के दो दिवसीय दौरे का पूरा लेखा-जोखा-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का असम दौरा इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बार वे सिर्फ एक राजनीतिक दौरे पर नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मानित करने पहुंचे हैं। भारत के महान गायक और संगीतकार, भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित समारोहों में उनकी उपस्थिति इस दौरे को खास बना रही है। पूरे राज्य में इस कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्साह है और इसे एक ऐतिहासिक आयोजन के तौर पर देखा जा रहा है। यह दौरा असम की समृद्ध संस्कृति और संगीत को एक नई पहचान दिलाने का अवसर है।

पहला दिन: भूपेन दा को सलाम और खास तोहफे-शनिवार की शाम, करीब 4:20 बजे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुवाहाटी में उतरे। उनका पहला पड़ाव एक खास बैठक थी, जहाँ उन्होंने डॉ. भूपेन हजारिका को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शाम 5:15 बजे शुरू हुई इस बैठक में संगीत जगत के कई जाने-माने लोग और भूपेन दा के करीबी शामिल हुए। पीएम मोदी ने इस मौके पर न केवल उनकी जीवन यात्रा पर प्रकाश डाला, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए एक विशेष स्मारक सिक्के का भी अनावरण किया। यह पूरा दिन भूपेन हजारिका के नाम समर्पित रहा, जो असम की सांस्कृतिक विरासत के उत्सव के रूप में मनाया गया।

100 रुपये का खास सिक्का: भूपेन दा के सम्मान में एक यादगार पहल-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खास मौके पर 100 रुपये का एक स्मारक सिक्का जारी किया, जो वाकई अनोखा है। यह सिक्का 40 ग्राम शुद्ध चांदी से बना है और इसका व्यास 44 मिलीमीटर है। सिक्के के एक तरफ भूपेन हजारिका की तस्वीर है, जिसके ऊपर और नीचे हिंदी और अंग्रेजी में ‘डॉ. भूपेन हजारिका जन्म शताब्दी’ लिखा है, और नीचे 2025 अंकित है। दूसरी तरफ अशोक स्तंभ और 100 रुपये का चिह्न है। यह सिक्का आम चलन के लिए नहीं है, बल्कि एक संग्रहणीय वस्तु है, जिसकी कीमत लगभग 7,600 से 8,000 रुपये के बीच रखी गई है। यह उन लोगों के लिए एक अनमोल तोहफा है जो संगीत और इतिहास से प्यार करते हैं।

‘भारत रत्न भूपेन हजारिका’ जीवनी: लाखों तक पहुंचेगी कहानी-इस महत्वपूर्ण अवसर पर, पीएम मोदी ने ‘भारत रत्न भूपेन हजारिका’ नामक एक विस्तृत जीवनी का भी विमोचन किया। इस किताब को साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता अनुराधा शर्मा पुजारी ने लिखा है। फिलहाल यह जीवनी असमिया भाषा में उपलब्ध है, लेकिन जल्द ही इसे भारत की प्रमुख भाषाओं में अनुवादित किया जाएगा। असम सरकार की योजना है कि इस जीवनी की लगभग 20 लाख प्रतियां देश भर के पुस्तकालयों में वितरित की जाएं। इसका मकसद यह है कि नई पीढ़ी भूपेन हजारिका के जीवन, उनके अद्भुत गीतों और समाज में उनके योगदान को गहराई से समझ सके।

1200 कलाकारों का संगीतमय नज़ारा: भूपेन दा को अनोखी श्रद्धांजलि-इस पूरे समारोह की सबसे खास बात 1200 कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला एक भव्य संगीतमय कार्यक्रम था। इन सभी कलाकारों ने मिलकर भूपेन हजारिका के 14 सबसे मशहूर गानों का एक मेडले पेश किया। यह 18 मिनट का कार्यक्रम भूपेन दा की रचनाओं की आत्मा को श्रोताओं के दिलों तक पहुंचाने का एक भावुक प्रयास था। इस आयोजन में उन लोगों ने भी हिस्सा लिया जिन्होंने अपने जीवन में भूपेन हजारिका के साथ काम किया या उनसे किसी भी तरह जुड़े रहे। यह वाकई असम की संस्कृति और संगीत को फिर से जीवंत करने वाला पल था।

सीएम सरमा ने जांची तैयारियां: असम पूरी तरह तैयार!-प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा गया। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद शुक्रवार देर रात खानापारा वेटनरी कॉलेज मैदान का दौरा कर अधिकारियों को सभी पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी यह जानकारी साझा की कि असम प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे यह साफ है कि इस आयोजन को लेकर पूरे राज्य में एक अलग ही उत्साह का माहौल है।

दूसरे दिन का प्लान: विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और जनता से सीधा संवाद-रविवार को अपने दौरे के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम में लगभग ₹19,000 करोड़ की कई बड़ी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। वे दरंग जिले के मंगलदोई और गोलाघाट जिले में नुमालिगढ़ रिफाइनरी का दौरा करेंगे। इन दोनों जगहों पर वे बड़ी जनसभाओं को भी संबोधित करेंगे। रविवार शाम को प्रधानमंत्री जोरहाट एयरपोर्ट से कोलकाता के लिए रवाना होंगे।

भूपेन हजारिका की विरासत: असम की पहचान का अहम हिस्सा-भूपेन हजारिका केवल असम के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक अनमोल सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनके गीतों ने समाज, संस्कृति और मानवता के हर पहलू को छुआ है। पीएम मोदी का यह दौरा न केवल एक सम्मान का अवसर है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। स्मारक सिक्का और जीवनी जैसी पहलें न केवल भूपेन दा को याद करने का जरिया हैं, बल्कि ये हमारी सांस्कृतिक पहचान को और भी मजबूत करती हैं।

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