इंदौर में कांग्रेस और बीजेपी युवा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक टकराव, पुलिस ने किया काबू

मध्यप्रदेश के इंदौर में शनिवार को कांग्रेस और बीजेपी की युवा इकाई के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। गांधी भवन के बाहर नारेबाजी से शुरू हुआ विवाद पत्थरबाजी और हंगामे में बदल गया, जिसमें पुलिसकर्मी और पत्रकार भी घायल हुए।
गांधी भवन के बाहर BJYM के विरोध से बढ़ा तनाव-इंदौर के कांग्रेस कार्यालय गांधी भवन के बाहर शनिवार को अचानक माहौल बिगड़ गया, जब बीजेपी के युवा संगठन BJYM के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंचे। यह विरोध दिल्ली में एक दिन पहले हुए यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन के खिलाफ था, जिससे पहले से ही तनाव था।
दिल्ली में AI समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन से शुरू हुआ विवाद-नई दिल्ली में ‘AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बिना शर्ट और विरोधी नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में सरकार और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लगाए गए, जिससे विवाद की शुरुआत हुई।
BJYM के विरोध की खबर पर कांग्रेस कार्यकर्ता भी गांधी भवन पहुंचे-BJYM के विरोध की सूचना मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में गांधी भवन के बाहर पहुंच गए। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई, जिससे तनाव और बढ़ गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
पुलिस ने लगाया बैरिकेड, फिर भी हुई पत्थरबाजी और सामान फेंकने की घटना-पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच दूरी बनाए रखने के लिए बैरिकेड लगाए, लेकिन कुछ लोगों ने पत्थर, पानी की बोतलें, संतरे और टमाटर फेंकना शुरू कर दिया। इससे माहौल और बिगड़ गया और हिंसा फैल गई।
भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने किया वॉटर कैनन का इस्तेमाल-स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर और दो पत्रकार समेत करीब 10 लोग घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस ने कहा—उपद्रवियों की पहचान कर होगी कार्रवाई-अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित सिंह ने बताया कि पत्थरबाजी करने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए वीडियो और सबूत जुटाए जा रहे हैं। कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
इंदौर की यह घटना राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती है। अब पुलिस की जांच और दोनों दलों के बीच बातचीत से ही स्थिति में सुधार की उम्मीद है।



