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पुतिन का बड़ा बयान: भारत-चीन जैसे मजबूत देशों पर ट्रम्प की औपनिवेशिक दबाव नीति नहीं चलेगी

पुतिन का कड़ा संदेश: भारत और चीन पर मनमानी नहीं चलेगी!-रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तेवरों पर करारा जवाब देते हुए एक ऐसी बात कही है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हलचल मचा दी है। पुतिन का कहना है कि आज के दौर में भारत और चीन जैसे बड़े और शक्तिशाली देशों पर पुराने जमाने की तरह, यानी औपनिवेशिक काल की तरह दबाव बनाने की कोशिशें बिल्कुल बेकार हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ये देश अपनी राजनीतिक व्यवस्था और अपने कानूनों के साथ चलते हैं, और इन्हें नजरअंदाज करके किसी भी तरह का दबाव डालना किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता। यह बयान दरअसल, उन देशों के लिए एक चेतावनी है जो अपनी ताकत के बल पर दूसरों को झुकाने की कोशिश करते हैं।

गुलामी की यादें अब भी ताज़ा: क्यों नहीं मानते बाहरी दबाव?-पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चीन जैसे देशों का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है। ये दोनों ही राष्ट्र लंबे समय तक विदेशी ताकतों के गुलाम रहे और अपनी आजादी व संप्रभुता के लिए कड़ा संघर्ष किया। ऐसे में, यदि आज कोई बड़ी ताकत इन देशों पर अपनी इच्छा थोपने या दबाव बनाने की कोशिश करती है, तो वहां की जनता और उनके नेता इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई भी नेता ऐसी स्थिति में कमजोरी दिखाता है, तो उसका राजनीतिक भविष्य तुरंत खतरे में पड़ सकता है। यह दिखाता है कि इन देशों की जनता अपनी राष्ट्रीय गरिमा को लेकर कितनी सजग है।

औपनिवेशिक युग बीता, अब बराबरी का ज़माना है!-पुतिन ने सीधे तौर पर अमेरिका को संबोधित करते हुए कहा कि वो दौर अब खत्म हो चुका है जब एक देश दूसरे पर हुक्म चलाता था। अब समय आ गया है कि सभी देशों को एक-दूसरे के साथ बराबरी और साझेदारी के रिश्ते से पेश आना चाहिए। भारत और चीन जैसे देशों से किसी भी तरह का आदेश देने या सजा सुनाने वाले अंदाज में बात करना बिल्कुल गलत है। पुतिन का मानना है कि दुनिया के नेताओं को इन देशों के ऐतिहासिक अनुभवों और उनकी वर्तमान ताकत को समझना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते और सिर्फ दबाव की राजनीति अपनाते हैं, तो उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगेगी।

ट्रम्प की नीतियां और पुतिन का जवाब-यह समझना ज़रूरी है कि पुतिन का यह बयान क्यों आया। डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भारत और चीन, दोनों पर ही आर्थिक दबाव बनाने की भरपूर कोशिश की थी। उन्होंने भारत को रूस से तेल खरीदने पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, वहीं चीन पर शुरुआत में तो 145% तक के टैरिफ लगा दिए थे। हालांकि, बाद में उन्हें भी अपनी नीतियों में नरमी लानी पड़ी और चीन के साथ एक समझौते के तहत टैरिफ कम करने पड़े। चीन ने भी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सामानों पर टैरिफ घटाए। यह दिखाता है कि दबाव की नीतियां हमेशा कारगर नहीं होतीं।

पुतिन का सार: सम्मान और बराबरी से हो बातचीत-अपने इस बयान के ज़रिए पुतिन ने एक बहुत ही स्पष्ट संदेश दिया है। उनका कहना है कि भारत और चीन जैसे देशों से आदेश देने के बजाय, हमें उनसे साझेदारी और आपसी सम्मान के साथ बात करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इन देशों की जनता को औपनिवेशिक काल की परेशानियां आज भी याद हैं, और इसलिए वे किसी भी तरह के बाहरी दबाव को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पुतिन के इस बयान को सीधे तौर पर अमेरिका की उन नीतियों पर निशाना माना जा रहा है, जिनमें वह अक्सर दूसरे देशों पर दबाव बनाने की कोशिश करता है।

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