Google Analytics Meta Pixel
National
Trending

TMC में बगावत से मचा भूचाल, ममता बनर्जी ने एक झटके में हटाए कई बड़े नेता

 

ममता बनर्जी ने बढ़ती बगावत के बीच लिया बड़ा फैसला-पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर चल रही असंतोष की लहर अब खुलकर सामने आ रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद बगावत की राह पर हैं, जिससे ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े बदलाव किए हैं। युवा मोर्चा की अध्यक्ष सायोनी घोष, महिला मोर्चा की अध्यक्ष माला रॉय और वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय जैसे बड़े नामों को पद से हटाया गया है। यह कदम पार्टी के भीतर चल रहे संकट को रोकने और नए नेतृत्व को मौका देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सायोनी घोष और माला रॉय की जगह नए चेहरे आएंगे-संगठन में बदलाव के तहत सायोनी घोष को युवा मोर्चा की अध्यक्षता से हटाकर अर्णब बनर्जी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं माला रॉय की जगह नदिया की विधायक अलीफा अहमद को महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई है। यह बदलाव केवल पदों की अदला-बदली नहीं, बल्कि उन नेताओं को संदेश देने के लिए भी है जो पार्टी नेतृत्व के खिलाफ या बागी गुट के साथ सहानुभूति रखते थे। नए नेताओं को मौका देकर ममता बनर्जी संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

सुदीप बंद्योपाध्याय को हटाने के पीछे की राजनीति-सुदीप बंद्योपाध्याय को कोलकाता जिला अध्यक्ष पद से हटाकर उनकी जगह ममता के करीबी कुणाल घोष को नियुक्त किया गया है। यह फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि दिल्ली में उनकी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद यह कदम उठाया गया। पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कारण नहीं बताया, लेकिन यह साफ है कि ममता बनर्जी ऐसे नेताओं को संगठन में मजबूत नहीं रखना चाहतीं जिनकी निष्ठा पर सवाल उठते हों।

बागी गुट का ‘असली TMC’ बनने का दावा-टीएमसी के बागी गुट ने खुद को ‘असली TMC’ बताने की कोशिश शुरू कर दी है। उनका दावा है कि वे लोकसभा में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता पाने की मांग करेंगे। इस गुट के पास लोकसभा के 28 में से 20 सांसदों का समर्थन है, जो ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका हो सकता है। सुदीप बंद्योपाध्याय के बागी गुट से जुड़ने की खबरों ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अब सबकी नजरें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं।

बागी गुट के एनडीए समर्थन के संकेत ने बढ़ाई राजनीति की गर्माहट-बागी गुट की नेता काकोली घोष ने कहा है कि अगर उन्हें अलग पहचान मिली तो वे बिना शर्त एनडीए का समर्थन करेंगे। इस बयान ने न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है। टीएमसी की भूमिका विपक्ष में महत्वपूर्ण रही है, इसलिए इसका एक बड़ा हिस्सा एनडीए के साथ जुड़ना राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। यह संगठनात्मक संकट अब राष्ट्रीय स्तर की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

विधानसभा में भी बगावत, अदालत तक पहुंचा मामला-टीएमसी के 80 विधायकों में से 64 पहले ही अलग हो चुके हैं और उन्हें विधानसभा अध्यक्ष ने मान्यता भी दी है। बागी विधायकों के नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाया गया है। ममता बनर्जी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन अदालत ने फिलहाल रोक नहीं लगाई है। यह कानूनी लड़ाई पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर असर डाल सकती है और भविष्य में इसके परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।

पुराने संगठन भंग कर पहले ही दिए थे संकेत-ममता बनर्जी ने बगावत के संकेत पहले ही भांप लिए थे। 5 जून को पार्टी की पुरानी कमेटियां भंग कर नई समन्वय समिति बनाई गई थी, जिसमें सायोनी घोष और माला रॉय को भी जिम्मेदारी मिली थी। लेकिन अब हालात बदलने पर दोनों नेताओं को पद से हटाया गया है। वहीं ममता ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को संगठन में बरकरार रखा है, जो पार्टी में उनकी पकड़ को मजबूत करता है।

वफादार सांसदों को संभालने की जिम्मेदारी सौगत राय को-बढ़ते संकट के बीच ममता बनर्जी ने वफादार नेताओं को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। इसी तहत वरिष्ठ सांसद सौगत राय को लोकसभा में पार्टी का मुख्य सलाहकार बनाया गया है। उनकी जिम्मेदारी पार्टी के प्रति वफादार सांसदों को एकजुट रखना और संसद में संगठन से जुड़े मुद्दों पर नजर रखना है। फिलहाल लोकसभा में कुछ ही सांसद पूरी तरह ममता के साथ हैं, इसलिए सौगत राय की भूमिका अहम मानी जा रही है।

 

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button