कपड़ा उद्योग को राहत: सरकार ने दिसंबर तक कॉटन आयात पर ड्यूटी फ्री छूट बढ़ाई

अमेरिकी टैक्स का झटका और सरकार का सहारा: भारत के टेक्सटाइल उद्योग को बड़ी राहत!
अमेरिकी टैक्स का साया और सरकार का बड़ा फैसला- आजकल भारत का कपड़ा उद्योग एक बड़ी मुश्किल से जूझ रहा है। अमेरिका ने हमारे टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी और लेदर जैसे सामानों पर 50% का भारी टैक्स लगा दिया है। यह हमारे निर्यातकों के लिए किसी झटके से कम नहीं है, क्योंकि अमेरिका हमारे लिए सबसे बड़ा बाज़ार है। इस टैक्स की वजह से हमारे उत्पाद महंगे हो गए हैं और विदेशी ग्राहक शायद सस्ते विकल्पों की ओर जाने लगें। ऐसे में, भारतीय कपड़ों की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पकड़ कमजोर हो सकती है। इसी मुश्किल घड़ी में, हमारी सरकार ने एक बहुत ही समझदारी भरा कदम उठाया है। उन्होंने कॉटन (कपास) पर लगने वाले आयात शुल्क को 30 सितंबर 2025 तक के लिए माफ कर दिया है। इसका मतलब है कि अब हमारे निर्यातक और घरेलू कारखाने बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कपास का आयात कर सकेंगे। यह फैसला लागत कम करने और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में टिके रहने में बहुत मददगार साबित होगा।
क्यों है यह कॉटन ड्यूटी माफी इतनी खास?- सरकार ने यह साफ कर दिया है कि कॉटन के आयात पर लगने वाले 5% बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को फिलहाल माफ कर दिया गया है। इतना ही नहीं, इन दोनों पर लगने वाले 10% सोशल वेलफेयर सरचार्ज से भी छूट मिल गई है। कुल मिलाकर, आयात पर लगने वाले लगभग 11% शुल्क को हटा दिया गया है। इससे सीधे तौर पर कपड़ा उद्योग की उत्पादन लागत कम हो जाएगी। धागे से लेकर तैयार कपड़ों तक, सब कुछ सस्ता होने की उम्मीद है। इसका सीधा फायदा आम ग्राहकों को भी मिलेगा, क्योंकि बाज़ार में महंगाई को काबू करने में मदद मिलेगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है कि उत्पादन की लागत कम हो ताकि हमारे भारतीय निर्यातक विदेशी बाज़ारों में दूसरों से मुकाबला कर सकें। यह छूट फिलहाल कुछ समय के लिए है, लेकिन उद्योग जगत के लिए यह किसी संजीवनी से कम नहीं है।
अमेरिकी टैक्स ने बढ़ाई मुश्किलें, पर सरकार ने संभाला मोर्चा-27 अगस्त से अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैक्स ने भारतीय कपड़ा निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अमेरिकी बाज़ार भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और इस भारी शुल्क के कारण हमारे उत्पाद की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। ऐसे में, ग्राहक शायद अन्य देशों से सस्ते कपड़े खरीदना पसंद करें, जिससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान होगा। सरकार का यह कदम इसी नुकसान की भरपाई करने और उद्योग को एक संतुलन में लाने का प्रयास है। आयात शुल्क में छूट मिलने से निर्यातक कम लागत पर अपना माल तैयार कर पाएंगे और अमेरिकी बाज़ार में अपने उत्पादों की कीमतें प्रतिस्पर्धी रख सकेंगे। यह एक अस्थायी राहत ज़रूर है, लेकिन इसने उद्योग जगत को बड़ी राहत दी है और उन्हें उम्मीद की किरण दिखाई है।
घरेलू बाज़ार में भी आएगी स्थिरता, आम आदमी को मिलेगा फायदा-पिछले कुछ महीनों से कपास की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, जिससे हमारे कपड़ा उद्योग पर काफी दबाव था। सरकार की इस नई छूट से घरेलू बाज़ार में भी कच्चे कपास की उपलब्धता बढ़ेगी। जब कपास आसानी से और सही दाम पर मिलेगा, तो बाज़ार में कीमतें स्थिर हो जाएंगी। इससे बने-बनाए कपड़े, सूती धागे और गारमेंट्स की कीमतों में भी कमी आने की पूरी संभावना है। इसका सबसे बड़ा फायदा आम ग्राहकों को होगा, क्योंकि कपड़े अब ज़्यादा किफायती हो जाएंगे। यह कदम महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद करेगा और उद्योग को भी थोड़ी राहत देगा।
छोटे और मझोले उद्योगों के लिए वरदान-भारत का कपड़ा उद्योग सिर्फ बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है। इसमें लाखों छोटे और मझोले उद्योग (SMEs) भी शामिल हैं, जो देश-विदेश में अपना काम करते हैं। बढ़ती लागत और अमेरिका के टैक्स ने इन छोटे व्यवसायों पर सबसे ज़्यादा असर डाला है। सरकार का यह कदम इन छोटे उद्यमों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्हें अब कच्चा माल सस्ता मिलेगा, जिससे उनकी उत्पादन लागत कम होगी। इससे वे अपना व्यवसाय बेहतर ढंग से चला पाएंगे और बाज़ार में दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। यह उनके लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।



