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“रीमेक फिल्में क्यों नहीं? शेक्सपियर भी तो रीमेक ही है” – आमिर खान का ट्रोलर्स को करारा जवाब

आमिर खान का करारा जवाब: रीमेक में क्या बुराई है?- क्या रीमेक बनाना वाकई ‘कॉपी’ करना है या फिर एक नई रचनात्मकता का प्रमाण? आमिर खान ने अपनी नई फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ के प्रमोशन के दौरान इस सवाल का जवाब दिया है।

आमिर की बेबाकी: पागलपन और क्रिएटिविटी- आमिर ने साफ-साफ कहा कि उन्हें रीमेक बनाने में कोई शर्म नहीं है। वो मानते हैं कि वो किसी और की कहानी को अपने अंदाज़ में, अपने विज़न से नए सिरे से पेश करते हैं। उनका कहना है कि ये क्रिएटिविटी की कमी नहीं, बल्कि एक अलग तरह की क्रिएटिविटी है। उन्होंने अपनी ‘पागलपन’ और अपनी रचनात्मकता में विश्वास पर ज़ोर दिया।

 शेक्सपियर से आमिर तक: एक तर्क- आमिर ने शेक्सपियर का उदाहरण दिया। दुनियाभर में शेक्सपियर के नाटक आज भी खेले जाते हैं, हर भाषा में, हर थिएटर ग्रुप उनकी कहानियों को दोहराता है। क्या किसी ने शेक्सपियर को ‘कॉपी’ करने के लिए कभी ट्रोल किया? नहीं, बल्कि उनकी तारीफ की गई। तो फिर फिल्मों के रीमेक को इतना नीचा क्यों आँका जाता है?

 रीमेक: सिर्फ़ कॉपी नहीं, बल्कि एक नया नज़रिया- आमिर का मानना है कि वो रीमेक में अपनी जान डालते हैं, अपनी सोच, अपनी एनर्जी, और अपने दर्शकों के लिए कुछ अलग। उन्होंने ‘गजनी’ का उदाहरण दिया, जो पहले तमिल में बनी थी, लेकिन हिंदी वर्जन में आमिर ने अपनी अनोखी शैली और विज़न जोड़ा। रीमेक सिर्फ कॉपी नहीं, बल्कि एक नया नज़रिया है।

 शेक्सपियर और रीमेक: एक ही सिक्के के दो पहलू?- आमिर ने कहा कि अगर रीमेक गलत है, तो शेक्सपियर के नाटक भी बंद कर देने चाहिए। उनका मानना है कि किसी कहानी को नए सिरे से बनाना, उसमें नया जोड़ना, एक नया नज़रिया देना, यही कला की खूबसूरती है।

रीमेक का नया अर्थ- आमिर ने न सिर्फ ट्रोलर्स को जवाब दिया, बल्कि रीमेक को लेकर समाज में बनी गलतफहमी को भी दूर करने की कोशिश की। उनका कहना है कि रीमेक में जान होनी चाहिए, एक नया नज़रिया होना चाहिए। अगर शेक्सपियर को आज भी हम दोहरा सकते हैं, तो फिर फिल्मों के रीमेक में क्या बुराई है?

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