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परमाणु हथियार के बिना भी यूक्रेन पर भारी पड़ेगा रूस, पुतिन ने इंटरव्यू में खोले इरादे

पुतिन का साफ संदेश: परमाणु बटन नहीं, रणनीति से जीत-यह लेख रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया बयानों पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने यूक्रेन संघर्ष में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया है।

परमाणु हथियारों की कोई जरूरत नहीं-पुतिन ने स्पष्ट किया है कि यूक्रेन में अपनी सैन्य रणनीति के जरिये वे अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। उनके पास पर्याप्त सैन्य ताकत है, और परमाणु हथियारों का सहारा लेने की उन्हें कोई आवश्यकता नहीं है। रूस को कई बार उकसाया गया, लेकिन वो अपनी रणनीति पर अडिग रहा।

 युद्ध का असली मकसद: कब्ज़ा नहीं, समाधान-पुतिन ने साफ किया है कि यह युद्ध सिर्फ भूमि कब्ज़े के लिए नहीं है। इसका असली मकसद है इस संकट के मूल कारणों को दूर करना, रूस की सुरक्षा को मज़बूत करना, और यूक्रेन में स्थायी शांति स्थापित करना। यह एक गहरा संघर्ष है जिसका समाधान ज़रूरी है।

 यूक्रेन की तटस्थता: पुतिन का दोहराया लक्ष्य-पुतिन ने फिर से ज़ोर देकर कहा कि उनका लक्ष्य यूक्रेन को एक तटस्थ देश बनाना है। रूसी भाषी लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और दीर्घकालिक शांति इस सैन्य कार्रवाई के पीछे की मुख्य वजहें हैं। यह उनकी पुरानी बात ही है।

 अमेरिका से उम्मीदें और बातचीत- पुतिन ने कहा कि रूस अमेरिकी हितों का सम्मान करता है और उम्मीद करता है कि अमेरिका भी रूस के हितों को समझेगा। उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बातचीत होने वाली है, जिसमें यूक्रेन संकट पर चर्चा होगी, जिससे सार्थक परिणाम की उम्मीद है।

 सहमति और मतभेद: कुछ सहमति, लेकिन कई चुनौतियाँ- रूस और अमेरिका के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। क्रीमिया की स्थिति और यूक्रेन को नाटो में शामिल न करने पर कुछ सहमति बनी है। लेकिन यूक्रेन के पूर्ण निरस्त्रीकरण और विदेशी सैनिकों की तैनाती जैसे मुद्दों पर अभी भी मतभेद हैं।

 यूक्रेन का नुकसान: रोज़ाना भारी क्षति- रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन को रोज़ाना 1245 से ज़्यादा सैनिकों का नुकसान हो रहा है। रूस ने पिछले 24 घंटों में यूक्रेन के 139 इलाकों पर हमले किए हैं। यह रूस के आक्रामक रुख को दर्शाता है।

 रणनीति पर अडिग रूस- पुतिन का यह बयान साफ़ करता है कि रूस अपनी रणनीति पर अडिग है। वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता, लेकिन अपनी ताकत से अपने लक्ष्य हासिल करेगा। अब सभी की नज़रें अमेरिका और रूस के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं।

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