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गाज़ा सीज़फायर पर रूस की भूमिका: क्या पुतिन शामिल होंगे ‘पीस बोर्ड’ में? जानिए पूरी कहानी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गाज़ा सीज़फायर के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने को लेकर साफ शब्दों में कहा है कि वे जल्दबाजी नहीं करेंगे। मॉस्को इस मामले में अपने रणनीतिक साझेदार देशों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगा। आइए विस्तार से समझते हैं इस मुद्दे की हर अहम बात।

पुतिन का ‘पीस बोर्ड’ में शामिल होने पर सोच-समझकर फैसला-रूस के राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि ‘पीस बोर्ड’ से जुड़े प्रस्तावों की पूरी जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी पहलुओं पर विचार नहीं हो जाता और सहयोगी देशों से राय नहीं मिलती, तब तक रूस कोई आधिकारिक सहमति नहीं देगा। यह संकेत है कि रूस इस मामले में पूरी सावधानी बरत रहा है।

अमेरिका की कोशिशों की सराहना और ट्रंप को धन्यवाद-पुतिन ने कहा कि रूस हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के प्रयासों का समर्थन करता रहा है और आगे भी करेगा। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन की भूमिका को स्वीकार करते हुए, विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘पीस बोर्ड’ में शामिल होने के न्योते के लिए धन्यवाद दिया। यह दिखाता है कि रूस इस पहल को गंभीरता से ले रहा है, लेकिन अपने शर्तों के साथ।

‘छोटे मंच’ से ‘वैश्विक बोर्ड’ बनने की तैयारी-शुरुआत में ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाज़ा सीज़फायर की निगरानी के लिए कुछ चुनिंदा देशों का समूह माना गया था। लेकिन अब यह मंच तेजी से बड़ा हो रहा है। ट्रंप प्रशासन ने कई देशों को न्योता भेजा है और संकेत दिए हैं कि भविष्य में यह बोर्ड बड़े वैश्विक संघर्षों में भी मध्यस्थता करेगा, लगभग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरह।

पश्चिम एशिया और फिलिस्तीनी मुद्दों पर केंद्रित प्रस्ताव-पुतिन ने बताया कि रूस को जो प्रस्ताव मिला है, वह मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति सुधारने, फिलिस्तीनी लोगों की समस्याओं को हल करने और गाज़ा पट्टी में मानवीय संकट से निपटने पर केंद्रित है। इसमें राजनीतिक समाधान के साथ-साथ मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण पर भी जोर दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र के फैसलों के आधार पर स्थायी समाधान की जरूरत-पुतिन ने कहा कि फिलिस्तीन-इज़राइल संघर्ष का कोई भी समाधान संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप होना चाहिए। उनका मानना है कि अस्थायी शांति से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थायी स्थिरता लाने वाला समाधान जरूरी है। यह बात रूस की नीति में स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान दर्शाती है।

गाज़ा के पुनर्निर्माण और बुनियादी जरूरतों पर जोर-राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि फिलिस्तीनी लोगों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसमें गाज़ा के पुनर्निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पानी की आपूर्ति और खाद्य व्यवस्था शामिल है। उनका कहना है कि बिना इन जरूरी कदमों के कोई भी शांति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती।

रूस का 1 अरब डॉलर का आर्थिक योगदान-पुतिन ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि रूस ‘पीस बोर्ड’ को 1 अरब अमेरिकी डॉलर की आर्थिक मदद देगा। यह रकम उन रूसी संपत्तियों से दी जा सकती है, जिन्हें पिछले अमेरिकी प्रशासन ने फ्रीज़ किया था। उन्होंने कहा कि यह योगदान फिलिस्तीनी लोगों के साथ रूस के खास रिश्तों को दर्शाता है, भले ही बोर्ड में शामिल होने का अंतिम फैसला बाद में हो।

महामूद अब्बास से अहम बातचीत-पुतिन ने बताया कि वे फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महामूद अब्बास से भी इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेंगे। अब्बास दो दिन के दौरे पर रूस आए हैं और गुरुवार को होने वाली यह बैठक गाज़ा संकट, शांति प्रयासों और मानवीय सहायता के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रूस गाज़ा सीज़फायर और ‘पीस बोर्ड’ को लेकर पूरी सावधानी से कदम बढ़ा रहा है। पुतिन ने साफ किया है कि कोई भी फैसला रणनीतिक साझेदारों से सलाह के बाद ही होगा। साथ ही, रूस ने 1 अरब डॉलर की मदद देने का प्रस्ताव रखा है, जो इस क्षेत्र में उसकी सक्रिय भूमिका को दर्शाता है। फिलहाल, दुनिया की नजरें रूस और फिलिस्तीनी नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं।

 

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