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अमेरिका के विदेश मंत्री से मिलेंगे एस. जयशंकर, UNGA से पहले अहम मुलाकात

 भारत-अमेरिका के बीच कूटनीतिक गरमाहट: न्यूयॉर्क में क्या होगा खास?

न्यूयॉर्क में कूटनीतिक चहल-पहल: जयशंकर और रुबियो की अहम मुलाकात-सोमवार का दिन न्यूयॉर्क के लिए बेहद खास होने वाला है, क्योंकि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र की शुरुआत के मौके पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात करेंगे। यह पहली बार होगा जब ये दोनों दिग्गज नेता आमने-सामने बैठकर द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। खास बात यह है कि यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया है, जिससे दोनों देशों के बीच कुल शुल्क 50% तक पहुंच गया है। यह स्थिति निश्चित रूप से दोनों देशों के रिश्तों में कुछ नई चुनौतियां पेश कर रही है, और इन मुलाकातों से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि इन मतभेदों को कैसे दूर किया जाए।

जुलाई की क्वाड बैठक के बाद पहली सीधी बातचीत: व्यापार पर भी होगा मंथन-इससे पहले जयशंकर और रुबियो जुलाई में वॉशिंगटन डीसी में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में मिले थे, लेकिन तब उनकी बातचीत बहुपक्षीय मंच पर हुई थी। यह पहली बार होगा जब वे सीधे तौर पर भारत और अमेरिका के बीच के द्विपक्षीय मसलों पर खुलकर बात करेंगे। इतना ही नहीं, इसी दिन दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौतों को लेकर भी महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं। उम्मीद है कि इन वार्ताओं से दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को कम करने और व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा देने में मदद मिलेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे आपसी हितों को साधते हुए कैसे आगे बढ़ते हैं।

व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने की कवायद: जल्द समझौते पर जोर-सोमवार को भारत और अमेरिका की व्यापारिक टीमों के बीच एक अलग बैठक भी होगी, जिसका नेतृत्व भारत की ओर से वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल करेंगे। सरकार का कहना है कि दोनों पक्ष आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हाल ही में 16 सितंबर को अमेरिकी प्रतिनिधियों और भारतीय अधिकारियों के बीच हुई बातचीत काफी सकारात्मक रही थी, जिससे यह उम्मीद और बढ़ गई है कि दोनों देश इस दिशा में और तेज़ी से कदम बढ़ाएंगे। यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

फिलीपींस के साथ भी मजबूत हुए रिश्ते: रणनीतिक सहयोग पर सहमति-न्यूयॉर्क पहुंचते ही एस. जयशंकर ने अपनी कूटनीतिक यात्रा की शुरुआत फिलीपींस के विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाजारो से मुलाकात करके की। उन्होंने राष्ट्रपति बॉन्गबॉन्ग मार्कोस की हालिया भारत यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोग को और मजबूत करने का वादा किया। फिलीपींस की विदेश मंत्री ने भारत-फिलीपींस रिश्तों को एक रणनीतिक साझेदारी बताते हुए रक्षा, सुरक्षा और समुद्री क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर विशेष जोर दिया। यह दिखाता है कि भारत अपने क्षेत्रीय पड़ोसियों के साथ संबंधों को कितना महत्व देता है।

UNGA में भारत की आवाज: वैश्विक मंच पर मजबूत उपस्थिति-जयशंकर इस पूरे सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें करेंगे। 27 सितंबर को वे महासभा के प्रतिष्ठित मंच से भारत का राष्ट्रीय बयान भी देंगे। यह बयान न केवल भारत के रुख को स्पष्ट करेगा, बल्कि वैश्विक मुद्दों पर उसके दृष्टिकोण को भी दुनिया के सामने रखेगा। हर बार की तरह, इस बार भी पूरी दुनिया की निगाहें भारत के संदेश पर टिकी होंगी। जयशंकर की ये मुलाकातें और उनका भाषण यह साफ संकेत देते हैं कि भारत वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका को और भी मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है और अपनी बात पुरजोर तरीके से रखने का इरादा रखता है।

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