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सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता: दोस्ती को नया आयाम

सऊदी-पाकिस्तान की नई दोस्ती: रक्षा समझौते से गरमाई क्षेत्रीय राजनीति!

एक ऐतिहासिक साझेदारी का आगाज़-सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक बेहद अहम रक्षा समझौता हुआ है, जिसने दोनों देशों के बीच सालों पुरानी दोस्ती को एक नई उड़ान दी है। ये सिर्फ एक कागज़ी कार्रवाई नहीं, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति में बड़े बदलावों का संकेत है। इस समझौते के तहत, दोनों मुल्क अब एक-दूसरे की सुरक्षा के लिए मिलकर खड़े होंगे। इसका मतलब है कि अगर किसी भी देश पर कोई आंच आती है, तो दूसरा देश उसका डटकर मुकाबला करेगा। यह कदम दोनों देशों के आपसी सामरिक हितों और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और भी मजबूत करेगा, जिससे उनकी साझेदारी और गहरी होगी।

समझौते की खास बातें और मिलकर सुरक्षा का वादा-सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग को बढ़ाना और किसी भी संभावित खतरे का मिलकर सामना करना है। इसमें यह साफ तौर पर कहा गया है कि एक देश पर हमला, दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। सऊदी प्रेस एजेंसी ने इस समझौते को एक ‘ऐतिहासिक साझेदारी’ और ‘साझा रणनीतिक हितों’ का परिणाम बताया है। इस तरह के समझौते पर काफी समय से चर्चा चल रही थी, और अब इसे अंतिम रूप दिया गया है। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यह एक व्यापक रक्षा सहयोग का हिस्सा है, जिसमें दोनों देशों के सभी सैन्य संसाधन शामिल होंगे, जिससे उनकी सैन्य क्षमताएं और बढ़ेंगी।

परमाणु हथियार और भारत पर इसका असर-सऊदी अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार इस समझौते के दायरे में नहीं आते और न ही इनसे कोई खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक व्यापक रक्षा समझौता है, जिसमें दोनों देशों के सभी सैन्य संसाधन शामिल हैं। भारत के साथ सऊदी अरब के संबंध हमेशा की तरह मजबूत हैं और आगे भी रहेंगे। सऊदी अरब क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए भारत के साथ अपने रिश्तों को और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह भी बताया गया है कि यह समझौता इजराइल द्वारा कतर पर हमले के कुछ दिनों बाद हुआ है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

दशकों पुराना सैन्य रिश्ता और भविष्य की राह-पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा और व्यापारिक संबंध दशकों से बहुत मजबूत रहे हैं। 1967 से लेकर अब तक, पाकिस्तान ने 8,200 से ज़्यादा सऊदी सैन्य अधिकारियों को ट्रेनिंग दी है। दोनों देशों ने मिलकर कई सैन्य अभ्यास भी किए हैं, जिससे उनके बीच आपसी विश्वास और सहयोग का स्तर काफी बढ़ा है। यह नया रक्षा समझौता इसी मजबूत रिश्ते को एक नई दिशा देगा और क्षेत्रीय सुरक्षा के ढांचे को और भी मज़बूत बनाएगा, जिससे दोनों देशों को भविष्य में और भी लाभ मिलेगा।

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