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स्लोवेनिया ने नेतन्याहू पर लगाया प्रवेश प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का किया समर्थन

नेतन्याहू पर स्लोवेनिया का कड़ा रुख: क्या है पूरा मामला?

स्लोवेनिया का बड़ा फैसला: नेतन्याहू की एंट्री पर रोक!-स्लोवेनिया ने हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया है जिसने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। उन्होंने साफ कह दिया है कि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को अब उनके देश में घुसने की इजाजत नहीं होगी। यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है, बल्कि स्लोवेनिया का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति उनकी गहरी निष्ठा और न्याय के पक्ष में खड़े होने के उनके जज्बे को दिखाता है। विदेश मंत्रालय की एक अधिकारी, नेवा ग्रासिक ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा नेतन्याहू के खिलाफ जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट से जुड़ा हुआ है। स्लोवेनिया का यह रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय अदालतों के आदेशों का पालन करना हर देश की जिम्मेदारी है, और इजराइल द्वारा कब्जे वाले इलाकों में की जा रही गैर-कानूनी गतिविधियों को वे किसी भी सूरत में बढ़ावा नहीं देंगे।

पहले भी लग चुके हैं इजराइल के मंत्रियों पर प्रतिबंध-यह पहली बार नहीं है जब स्लोवेनिया ने इजराइल के किसी बड़े नेता पर इस तरह का प्रतिबंध लगाया हो। इससे पहले भी, उन्होंने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गविर और वित्त मंत्री बेज़ल श्मोट्रिच को भी अपने देश में आने से रोक दिया था। इतना ही नहीं, स्लोवेनिया ने इजराइल को हथियारों की सप्लाई पर भी रोक लगा दी है। आपको याद होगा कि पिछले साल स्लोवेनिया ने फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता दी थी और तब से वे गाजा में इजराइल की कार्रवाइयों की लगातार आलोचना करते आ रहे हैं। यह नया प्रतिबंध भी उसी कड़ी नीति का एक हिस्सा माना जा रहा है, जो उनके सिद्धांतों पर आधारित विदेश नीति को दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के प्रति स्लोवेनिया की अटूट प्रतिबद्धता-स्लोवेनियाई सरकार ने अपने इस फैसले के पीछे की मंशा साफ करते हुए कहा है कि वे इजराइल को यह कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय अदालतों के फैसलों और मानवता के प्रति बने कानूनों का सम्मान करना बेहद जरूरी है। सरकार का यह भी मानना है कि इस कदम से स्लोवेनिया एक बार फिर यह साबित करता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और अपनी नीतियों की स्थिरता के प्रति कितने गंभीर हैं। यह निर्णय न केवल उनकी विदेश नीति की मजबूती को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले देश हैं, जो वैश्विक न्याय और शांति के लिए अपनी आवाज उठाने से कतराते नहीं हैं।

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