कच्चे तेल की आग से धधका शेयर बाजार: सेंसेक्स 2700 अंकों से ज्यादा टूटा, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट

मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के उछाल का भारतीय शेयर बाजार पर असर-भारतीय शेयर बाजार पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव देखने को मिला। सोमवार सुबह जैसे ही बाजार खुला, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट आई। निवेशकों में चिंता और घबराहट साफ नजर आई, जिससे शुरुआती कारोबार के दौरान बाजार दबाव में आ गया।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट-सोमवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 2,743.46 अंक यानी 3.37% की गिरावट के साथ 78,543.73 पर आ गया। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 533.55 अंक यानी 2.11% टूटकर 24,645.10 पर बंद हुआ। यह गिरावट अचानक वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आई, जिससे निवेशकों ने तेजी से मुनाफा निकालना शुरू कर दिया।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई?-सेंसेक्स के बड़े शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, लार्सन एंड टुब्रो, अडानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। ये कंपनियां शुरुआती कारोबार में दबाव में रहीं। हालांकि, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ही एक ऐसा शेयर था जिसने बढ़त दर्ज की और गिरते बाजार में थोड़ी राहत दी।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और बाजार पर दबाव-ब्रेंट क्रूड की कीमत 5.38% बढ़कर 76.79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति बनी रही तो ऊर्जा की लागत बढ़ेगी, जिससे महंगाई बढ़ेगी और कंपनियों के मुनाफे पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
पश्चिम एशिया का तनाव और वैश्विक बाजारों पर असर-ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने मिसाइलें दागीं, जिससे स्थिति और बिगड़ी। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखी गई, जैसे जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंगसेंग नीचे रहे, जबकि शंघाई सूचकांक मामूली बढ़त में था। अमेरिकी बाजार भी पिछले शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली, घरेलू निवेशकों का सहारा-एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 7,536.36 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 12,292.81 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्रीय अस्थिरता लंबी चली तो सप्लाई चेन और वैश्विक वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है।
शुक्रवार को भी बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी-शुक्रवार को भी सेंसेक्स 961.42 अंक यानी 1.17% गिरकर 81,287.19 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 317.90 अंक यानी 1.25% टूटकर 25,178.65 पर बंद हुआ। कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल अनिश्चितता का माहौल है और निवेशक इस स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को कमजोर कर दिया है। निवेशकों को इस अनिश्चित माहौल में सतर्क रहना होगा क्योंकि वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाएं सीधे बाजार की दिशा तय कर रही हैं। ऐसे समय में बाजार की चाल पर नजर रखना और समझदारी से निवेश करना जरूरी है।



