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अमेरिका के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चीन सतर्क मोड में—ट्रंप की यात्रा से पहले बढ़ी हलचल

अमेरिका के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चीन की कड़ी प्रतिक्रिया और व्यापारिक हलचल-अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दुनिया में हलचल मचा दी है। खासकर चीन ने इस फैसले को लेकर गंभीर रुख अपनाया है और इसके प्रभावों का गहराई से अध्ययन शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे वक्त में आया है जब ट्रंप जल्द ही चीन का दौरा करने वाले हैं, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

चीन की समीक्षा: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गहराई से नजर-चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूरी तरह से मूल्यांकन कर रहा है, जिसमें इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी बताया गया है। चीन इस फैसले के हर पहलू को समझने की कोशिश कर रहा है क्योंकि इसका असर उसके व्यापार और आर्थिक रणनीति पर सीधे पड़ता है। वह जानना चाहता है कि इससे अमेरिका की भविष्य की व्यापार नीति और द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर होगा।

ट्रंप की चीन यात्रा से पहले बढ़ी कूटनीतिक तैयारियां-डोनाल्ड ट्रंप 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच चीन का दौरा करने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। इस बैठक में व्यापार, टैरिफ और आर्थिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। चीन इस फैसले के प्रभाव को समझकर अपनी रणनीति तैयार करना चाहता है ताकि बातचीत में मजबूती से अपनी बात रख सके। यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अमेरिका का बयान: वार्ता पर फैसले का असर नहीं पड़ेगा-अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का चीन के साथ चल रही वार्ता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उनका मानना है कि इस बैठक का मकसद व्यापार विवाद बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थिरता बनाए रखना है। अमेरिका चाहता है कि चीन अमेरिकी कृषि उत्पादों और बोइंग विमान जैसी चीजों की खरीद जारी रखे। इस बयान से साफ होता है कि अमेरिका व्यापारिक बातचीत को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है।

पहले से दी गई टैरिफ में राहत और व्यापारिक तनाव में कमी-अमेरिका और चीन के बीच पहले हुए एक अंतरिम समझौते के तहत दोनों देशों ने टैरिफ में कुछ राहत दी थी। अमेरिका ने चीनी सामानों पर टैरिफ घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया था, जबकि चीन ने अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत किया था। इस कदम को व्यापारिक तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक प्रयास माना गया था, जिससे दोनों देशों के व्यापार में स्थिरता आई और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोनों देशों की आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है।

चीन का विरोध: टैरिफ हटाने की मांग और संरक्षणवाद पर चिंता-चीन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह एकतरफा टैरिफ लगाने का विरोध करता है। वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता और संरक्षणवाद अंत में नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और अमेरिका के अपने कानूनों के खिलाफ हैं। चीन ने अमेरिका से इन टैरिफ को हटाने की मांग की है। उनका मानना है कि सहयोग से दोनों देशों को फायदा होता है, लेकिन टकराव से नुकसान होता है।

अमेरिका की नई रणनीति पर चीन की सतर्कता-चीन ने कहा है कि उसे जानकारी मिली है कि अमेरिका टैरिफ बनाए रखने के लिए नए तरीके अपनाने की तैयारी कर रहा है, जैसे व्यापार जांच शुरू करना। चीन ने साफ किया है कि वह अमेरिका के हर कदम पर नजर रखेगा और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। चीन ने संकेत दिया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे साफ है कि आने वाले समय में अमेरिका-चीन के व्यापारिक संबंधों में नई दिशा देखने को मिल सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई चुनौतियां और अवसर दोनों सामने आ रहे हैं। चीन की कड़ी प्रतिक्रिया और ट्रंप की आगामी यात्रा इस दिशा में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत और सहयोग की दिशा में आगे क्या कदम होंगे, यह आने वाले समय में साफ होगा।

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