तमिलनाडु के सीएम स्टालिन का बड़ा बयान: “दिल्ली का वर्चस्व अब बर्दाश्त नहीं”

तमिलनाडु के सीएम स्टालिन का केंद्र पर तीखा प्रहार: “हमारा राज्य, हमारी पहचान!”-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने हाल ही में केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने देश के संघीय ढांचे, भाषा नीति, शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी है। आइए, उनके विचारों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं।
संघीय ढांचे की मजबूती: राज्यों में ही देश की जान!-स्टालिन का मानना है कि देश की असली ताकत उसके राज्य ही हैं। इसलिए, केंद्र सरकार को ‘यूनियन गवर्नमेंट’ कहना ज्यादा सही है। इससे यह बात साफ होती है कि राज्यों का योगदान ही देश को मजबूत बनाता है। यह एक महत्वपूर्ण विचार है जो राज्यों के अधिकारों और उनकी भूमिका पर जोर देता है।
हिंदी थोपने की कोशिशें बर्दाश्त नहीं!-मुख्यमंत्री ने फिर से केंद्र पर हिंदी भाषा को थोपने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भारत की विविधता को दबाने की बजाय उसका सम्मान करना चाहिए। तमिलनाडु किसी भी कीमत पर हिंदी थोपने की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। यह तमिलनाडु की अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की दृढ़ इच्छा को दर्शाता है।
NEET परीक्षा: छात्रों के भविष्य से खिलवाड़?-स्टालिन ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाया है कि वे तमिलनाडु को NEET परीक्षा से छूट क्यों नहीं दे रहे हैं। उनके अनुसार, यह राज्य के छात्रों के हितों के खिलाफ है और शिक्षा के अधिकार को भी प्रभावित करता है। यह मुद्दा राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और समानता को लेकर चिंताएं पैदा करता है।
शिक्षा के लिए फंड रोकना: विकास को बाधित करने की चाल?-मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के लिए शिक्षा के लिए आने वाले फंड को रोक दिया है। उनका कहना है कि यह कदम राज्य के विकास को धीमा करने की एक सोची-समझी कोशिश है। यह आरोप शिक्षा क्षेत्र में निवेश और राज्य के विकास पर सीधा असर डालता है।
कीलाड़ी की खोज: सच्चाई को क्यों छुपाया गया?-स्टालिन ने कीलाड़ी में हुई पुरातत्व खोज की सच्चाई को दबाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह खोज तमिल सभ्यता की प्राचीनता को उजागर करती है और इसे सबके सामने लाना देश के लिए गर्व की बात होनी चाहिए। यह मुद्दा इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ा है।
तमिलनाडु में बीजेपी के लिए ‘नो एंट्री’!-मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की विचारधारा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोग अपनी संस्कृति और अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेंगे। यह बयान राज्य की राजनीतिक दिशा और क्षेत्रीय पहचान को लेकर एक मजबूत संदेश देता है।
अन्नादुरई की विचारधारा: द्रविड़ राजनीति का आधार-स्टालिन ने याद दिलाया कि 1972 में जब AIADMK पार्टी बनी थी, तब उसकी विचारधारा सी.एन. अन्नादुरई के सिद्धांतों पर आधारित थी। आज भी द्रविड़ राजनीति इन्हीं विचारों के साथ आगे बढ़ रही है। यह बयान पार्टी की जड़ों और विचारधारा की निरंतरता को रेखांकित करता है।



