ईरान में सबसे बड़ा आंतरिक संकट: जनता सड़कों पर, अमेरिका की कड़ी चेतावनी

ईरान- ईरान आज अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। देशभर में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो रहे हैं और हालात दिन-ब-दिन तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को सख्त चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई या उन्हें दबाने की कोशिश हुई, तो अमेरिका सीधे हस्तक्षेप करेगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। आइए विस्तार से जानते हैं इस संकट की पूरी कहानी।
ट्रंप की चेतावनी: ईरान में बड़ी मुसीबत-डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को सीधे चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान गंभीर संकट में है और लोग ऐसे शहरों पर कब्जा कर रहे हैं, जिनके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था। ट्रंप ने साफ किया कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाएगी, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा और इस बार वह पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना है कि ईरानी शासन ने अपने ही लोगों के साथ गलत किया है और अब उसे इसका खामियाजा भुगतना होगा।
गोलीबारी से बचने की सलाह, लेकिन तनाव बढ़ा-10 जनवरी को ट्रंप ने और सख्त लहजे में कहा कि बेहतर होगा कि ईरान गोलीबारी शुरू न करे, क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका भी कड़ा जवाब देगा। इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ईरान में हालात बिगड़े, तो अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। पश्चिम एशिया पहले से ही कई संकटों से गुजर रहा है, ऐसे में ट्रंप की चेतावनी को आग में घी डालने जैसा माना जा रहा है।
आंदोलन की जड़: बिगड़ती अर्थव्यवस्था-ईरान में हो रहे प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह देश की खराब होती आर्थिक स्थिति है। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और ईरानी मुद्रा रियाल की गिरती कीमत ने आम जनता का गुस्सा बढ़ा दिया है। 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के दो बड़े बाजारों से शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया। शुरू में यह प्रदर्शन महंगाई और रोजमर्रा की परेशानियों के खिलाफ था, लेकिन अब यह इस्लामी शासन के खिलाफ खुला असंतोष बन चुका है। लोग अब सिर्फ राहत नहीं, बल्कि बदलाव की मांग कर रहे हैं।
पूरे देश में फैले प्रदर्शन, इंटरनेट बंद और उड़ानें रद्द-मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ये प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। बड़े शहरों से लेकर दूर-दराज के इलाकों तक लोग सड़कों पर हैं। अब तक कम से कम 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं, लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि प्रदर्शनकारियों के बीच संपर्क न हो सके। इसके अलावा, दुबई और ईरान के बीच कम से कम 17 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है।
खामेनेई का जवाब: अमेरिका और इजरायल पर आरोप-ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने ट्रंप पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप अहंकारी हैं और उनके हाथ ईरानी लोगों के खून से सने हैं। खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल को “आतंकी एजेंट” करार देते हुए आरोप लगाया कि वे देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी ही सड़कों को तबाह कर रहे हैं ताकि अमेरिका को खुश किया जा सके। साथ ही, न्यायपालिका प्रमुख ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
रेजा पहलवी की अपील: ट्रंप से मदद की गुहार-ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने भी ट्रंप से मदद की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यह एक तत्काल और जरूरी अपील है और अमेरिका को ईरानी लोगों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए। पहलवी लगातार लोगों से खामेनेई के शासन के खिलाफ आवाज उठाने को कह रहे हैं। उनके समर्थन में प्रदर्शनकारियों ने उनके ईरान लौटने के नारे भी लगाए हैं, जिससे आंदोलन राजनीतिक रूप से और मजबूत होता जा रहा है।
2022 के बाद सबसे बड़ा संकट, दुनिया की नजरें ईरान पर-ईरान में चल रहे ये विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़ी चुनौती हैं। जनता का गुस्सा खुलकर सड़कों पर है और अमेरिका की चेतावनी ने हालात को और जटिल बना दिया है। पूरी दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि ईरानी सरकार आगे क्या कदम उठाती है और क्या अमेरिका वाकई किसी ठोस कार्रवाई की तैयारी में है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संकट केवल आंतरिक रहेगा या इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचेगा।



