महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार के विलय की कहानी: अधूरी कोशिश और नए मोड़

विलय की योजना पर अचानक ब्रेक, अजित पवार के निधन ने सब कुछ बदल दिया- महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के विलय की चर्चा लंबे समय से थी। 12 फरवरी 2026 को इस विलय की घोषणा तय थी, लेकिन उपमुख्यमंत्री और एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार के असमय निधन ने सारी योजना को रोक दिया। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस मुद्दे पर आगे बढ़ने में हिचक रहे हैं।
शरद पवार के बयान में दिखी नाराजगी, मुंबई में लिए जा रहे फैसले-बारामती में पत्रकारों से बातचीत में शरद पवार ने पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई अहम फैसले मुंबई में लिए जा रहे हैं, जिन पर व्यापक चर्चा नहीं होती। खासकर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम लेकर उन्होंने कहा कि कुछ लोग पहल कर रहे हैं, लेकिन सभी को साथ नहीं लिया जा रहा।
सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने की जानकारी भी नहीं थी शरद पवार को-शरद पवार ने साफ किया कि उन्हें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की खबर भी अखबारों से ही मिली। उन्होंने कहा कि यह फैसला संबंधित पार्टी ने लिया होगा और इस पर उनसे कोई चर्चा नहीं हुई। यह बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मुंबई में हुई मुलाकातें, बढ़ी राजनीतिक चर्चाएं-सुनेत्रा पवार अपने बेटे जय के साथ मुंबई पहुंचीं, वहीं उनके बड़े बेटे पार्थ पवार ने शरद पवार से मुलाकात की। हालांकि इस मुलाकात में क्या बातें हुईं, इसका खुलासा नहीं हुआ। इन मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
सुप्रिया सुले ने रखा मौन, परिवार में एकजुटता का संदेश दिया-एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से बचा। वे अजित पवार की मां और अपनी चाची आशाताई पवार से मिलने पहुंचीं। इसे परिवार में संवेदना और एकजुटता का प्रतीक माना गया।
शरद पवार ने खारिज की परिवार में फूट की बातें-शरद पवार ने साफ कहा कि परिवार में कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर परिवार में कोई समस्या होती तो वह एकजुट रहता। उन्होंने यह भी कहा कि सारी चर्चाएं मुंबई में हो रही हैं, बारामती में नहीं। यह बयान पार्टी नेतृत्व के अंदर चल रही जटिलताओं की ओर इशारा करता है।
विलय की बातचीत चल रही थी, अजित पवार ने की थी पहल-शरद पवार ने स्वीकार किया कि दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर बातचीत चल रही थी और 12 फरवरी की तारीख तय की गई थी। अजित पवार, जयंंत पाटिल और शशिकांत शिंदे के बीच लगातार संपर्क था और वे इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रहे थे।
अजित पवार की अंतिम कोशिशें और जयंंत पाटिल का समर्थन-शरद पवार ने बताया कि पिछले चार महीनों में अजित पवार और जयंंत पाटिल के बीच कई बार बातचीत हुई। जयंंत पाटिल ने भी कहा कि अजित पवार पार्टी को जोड़ने के लिए पूरी कोशिश कर रहे थे और वे पुराने मतभेद भूलकर शरद पवार के साथ काम करना चाहते थे।
जिला परिषद चुनावों में भी बनी थी सहमति, विलय की तैयारी थी अंतिम चरण में-जयंंत पाटिल ने बताया कि 16 जनवरी को दोनों गुटों ने मिलकर आगामी जिला परिषद चुनाव लड़ने का फैसला किया था। अजित पवार ने इस योजना की जानकारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी दी थी। इससे साफ है कि विलय की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी, लेकिन उनकी मौत ने इसे अधूरा छोड़ दिया।



