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बंगाल में सत्ता बदलने की आहट? एग्जिट पोल ने बढ़ाई सियासी हलचल, जानिए पूरा गणित

बंगाल में सत्ता परिवर्तन की आहट? एग्जिट पोल ने बढ़ाई सियासी हलचल, जानिए पूरा गणित-पश्चिम बंगाल की राजनीति इस वक्त बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। 2026 विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजों ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो सकता है। मैटराइज के सर्वे के मुताबिक, राज्य की 294 सीटों में सत्ता की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। ममता बनर्जी की टीएमसी अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं भाजपा भी मजबूत चुनौती दे रही है। इस रिपोर्ट के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

ओवरऑल रिपोर्ट: सीटों का बंटवारा कैसा दिखता है?-मैटराइज के एग्जिट पोल के अनुसार भाजपा इस बार बहुमत के करीब या उससे आगे जा सकती है। अनुमान है कि भाजपा को 146 से 161 सीटें मिल सकती हैं, जबकि टीएमसी को 125 से 140 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। अन्य दलों को 6 से 10 सीटें मिल सकती हैं। वोट शेयर में भाजपा को करीब 42.5% और टीएमसी को 40.8% वोट मिलने का अनुमान है। यह सर्वे 68,750 लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

चुनावी मुद्दे: जनता के असली सवाल क्या हैं?-इस बार चुनाव सिर्फ नारों पर नहीं, बल्कि जमीनी मुद्दों पर टिका नजर आया। बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसे 14% लोगों ने प्राथमिक चिंता बताया। इसके अलावा चुनावी हिंसा, अवैध घुसपैठ, सरकार के खिलाफ नाराजगी और भ्रष्टाचार भी अहम कारण रहे। महिला सुरक्षा, महंगाई और धार्मिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे। इन सबने चुनाव की दिशा तय की है।

बदलता बंगाल: योजनाओं से ज्यादा मुद्दों का असर-ममता बनर्जी की लोकप्रियता अभी भी कायम है, लेकिन अब लोगों का ध्यान सीधे मुद्दों पर है। बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ने आम जनता के मन में सवाल खड़े किए हैं। SSC घोटाले जैसी घटनाओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। महिला सुरक्षा को लेकर भी सरकार की छवि प्रभावित हुई है। अब लोग योजनाओं से ज्यादा काम और जवाबदेही की उम्मीद करते हैं।

उत्तर बंगाल: भाजपा की मजबूत पकड़-उत्तर बंगाल के जिलों में भाजपा की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। यहां की 54 सीटों में भाजपा को 30 से 33 सीटें मिल सकती हैं, जबकि टीएमसी 15 से 18 सीटों तक सीमित रह सकती है। सीमावर्ती इलाकों में अवैध घुसपैठ और विकास जैसे मुद्दों ने भाजपा को फायदा पहुंचाया है। यह इलाका भाजपा के लिए मजबूत आधार बन चुका है।

दक्षिण बंगाल: टीएमसी के गढ़ में कड़ी टक्कर-दक्षिण बंगाल को टीएमसी का गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा है। यहां की 183 सीटों में टीएमसी को 88 से 98 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा 80 से 90 सीटों तक पहुंच सकती है। वोट शेयर में दोनों के बीच ज्यादा फर्क नहीं है। भाजपा ने यहां अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और टीएमसी के लिए चुनौती बढ़ी है।

राढ़ बंगाल: बराबरी की जंग तय करेगी नतीजा-राढ़ बंगाल का इलाका इस चुनाव का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। यहां की 57 सीटों पर मुकाबला लगभग बराबरी का है। टीएमसी को 26 से 32 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा 25 से 30 सीटों तक पहुंच सकती है। इस क्षेत्र का नतीजा तय करेगा कि सत्ता किसके हाथ में जाएगी। दोनों पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर है।

जेंडर फैक्टर: पुरुष और महिला वोटरों की अलग पसंद-इस बार वोटिंग पैटर्न में पुरुष और महिला वोटरों के बीच फर्क साफ दिख रहा है। पुरुष मतदाताओं में भाजपा को करीब 44% समर्थन मिला है, जबकि महिलाओं में टीएमसी अब भी मजबूत है, जहां 44% महिला वोट टीएमसी के पक्ष में गए हैं। यह दर्शाता है कि महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं का असर अभी भी कायम है।

 सियासी माहौल हुआ गरम, नतीजों पर सबकी नजर-एग्जिट पोल के आंकड़े इस बार पश्चिम बंगाल में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि असली तस्वीर 4 मई को वोटों की गिनती के बाद ही साफ होगी, लेकिन अभी से ही सियासी माहौल गर्म हो चुका है। सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

 

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