
शिवसेना (UBT) का बड़ा फैसला: बागी सांसद नागेश पाटिल के बेटे को पार्टी से निकाला, महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल-महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बागी सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर के बेटे कृष्णा पाटिल अष्टीकर को पार्टी से बाहर कर दिया है। यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) छह लोकसभा सांसदों की बगावत का सामना कर रही है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके असर देखने को मिल सकते हैं।
पार्टी विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई, कृष्णा पाटिल को किया बाहर-शिवसेना (UBT) के नेतृत्व ने सोमवार को बड़ा कदम उठाते हुए कृष्णा पाटिल अष्टीकर को पार्टी से निष्कासित कर दिया। कृष्णा पाटिल, बागी सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर के बेटे हैं और हाल ही में महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में नांदेड़ स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार भी थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और बताया कि उद्धव ठाकरे ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण यह फैसला लिया है। इसे पार्टी अनुशासन बनाए रखने और बगावत के खिलाफ सख्त संदेश माना जा रहा है।
छह सांसदों की बगावत से बढ़ी उद्धव ठाकरे की मुश्किलें-नागेश पाटिल अष्टीकर उन छह सांसदों में हैं जिन्होंने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के खिलाफ अलग रुख अपनाया है। उनकी नाराजगी ने पार्टी के अंदर असहज माहौल बना दिया है। नागेश पाटिल ने कहा कि 18 जून तक उन्होंने कोई अलग रास्ता नहीं चुना था, लेकिन बाद में उनकी सोच बदली। माना जा रहा है कि उनका इशारा पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत की ओर था। यह बयान दिखाता है कि पार्टी में मतभेद केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर तक पहुंच गए हैं।
नागेश पाटिल ने स्वीकारा शिंदे गुट का साथ-‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच नागेश पाटिल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर साफ किया कि उन्होंने शिवसेना के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन किया है। यह बयान उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों को खत्म करता है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम अन्य नेताओं के फैसलों को भी प्रभावित कर सकता है और उद्धव ठाकरे के लिए चुनौतियां बढ़ा सकता है।
“एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना में गया हूं” – नागेश पाटिल-नागेश पाटिल ने कहा कि उन्होंने अपनी विचारधारा में कोई बदलाव नहीं किया है। वे सिर्फ एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना में गए हैं और उनके राजनीतिक विचार पहले जैसे ही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। हालांकि शिवसेना (UBT) समर्थक इस दावे से सहमत नहीं हैं और मानते हैं कि विरोधी खेमे में जाना वैचारिक निरंतरता नहीं दिखाता। दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो रही है।
विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिलने का आरोप-नागेश पाटिल ने बताया कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए कई प्रयास किए, लेकिन उन्हें पर्याप्त फंड नहीं मिला। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर कोशिश की, लेकिन सहयोग नहीं मिला। इसलिए उन्होंने क्षेत्र के हित में नया राजनीतिक रास्ता चुना। यह आरोप राजनीतिक रूप से अहम है क्योंकि विकास और फंड की कमी जनता से सीधे जुड़ा मुद्दा है। अब देखना होगा कि शिवसेना (UBT) की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।



