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Politics

राष्ट्रपति से मिलने को TMC की बार-बार कोशिश नाकाम, अब 2 अप्रैल से पहले मांगा नया समय

राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिशें फिसलीं, टीएमसी की मांग बनी चर्चा का विषय-त्रिनमूल कांग्रेस (टीएमसी) की ओर से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की मांग को बार-बार ठुकराए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। “समय की कमी” का हवाला देते हुए राष्ट्रपति भवन ने मुलाकात से इनकार किया है, लेकिन टीएमसी ने हार नहीं मानी और 2 अप्रैल से पहले फिर से मिलने का अनुरोध किया है।

डेरिक ओ’ब्रायन के लगातार पत्र और मुलाकात की मांग-टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरिक ओ’ब्रायन ने सबसे पहले 9 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलने का समय मांगा था। इस डेलीगेशन का मकसद पश्चिम बंगाल सरकार की योजनाओं और कामकाज की जानकारी देना था। हालांकि, दो दिन बाद ही इस अनुरोध को खारिज कर दिया गया। इसके बाद 16 से 20 मार्च के बीच फिर से पत्र भेजा गया और 16 मार्च को रिमाइंडर भी दिया गया, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

“समय की कमी” बनी मुलाकात से इनकार की वजह-22 मार्च को राष्ट्रपति भवन की ओर से जवाब मिला कि फिलहाल समय की कमी के कारण मुलाकात संभव नहीं है। इसके बाद डेरिक ओ’ब्रायन ने 24 मार्च से 2 अप्रैल के बीच समय देने की अपील करते हुए नया पत्र लिखा। लगातार कोशिशों से साफ है कि टीएमसी इस मुलाकात को लेकर गंभीर है और अपनी बात राष्ट्रपति तक पहुंचाना चाहती है।

डेलीगेशन में मंत्री और सांसद भी शामिल होने वाले थे-सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी ने 12 से 15 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल की योजना बनाई थी, जिसमें राज्य के मंत्री और सांसद शामिल थे। इस टीम का मकसद था कि वे सीधे राष्ट्रपति से मिलकर सरकार की योजनाओं और कामों के बारे में विस्तार से जानकारी दें और अपनी बात स्पष्ट रूप से रखें।

राष्ट्रपति की आलोचना के बाद बढ़ी टीएमसी की सक्रियता-यह मामला तब और महत्वपूर्ण हो गया जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में दार्जिलिंग दौरे के दौरान कुछ व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने प्रोटोकॉल के अनुसार स्वागत न होने और आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद टीएमसी ने राष्ट्रपति से मिलने की कोशिशें तेज कर दीं।

टीएमसी की मंशा: सरकार की योजनाएं राष्ट्रपति के सामने रखना-टीएमसी का कहना है कि वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की उन योजनाओं को राष्ट्रपति के सामने रखना चाहती है, जो समाज के हर वर्ग के विकास के लिए चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं में शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलें शामिल हैं, जिनका फायदा खासकर एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों को मिल रहा है।

आगे क्या होगा? सबकी नजरें राष्ट्रपति भवन पर टिकीं-अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या राष्ट्रपति भवन इस बार टीएमसी को मिलने का समय देगा या नहीं। लगातार तीन बार अनुरोध के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। अगर मुलाकात होती है, तो यह राजनीतिक रूप से भी एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाएगा।

राष्ट्रपति से मुलाकात की कोशिशों में आ रही रुकावटों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। टीएमसी की लगातार मांग और राष्ट्रपति भवन की प्रतिक्रिया इस मामले को और भी दिलचस्प बना रही है। आने वाले दिनों में इस मुलाकात का फैसला राजनीतिक दिशा तय कर सकता है।

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