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EU के साथ ट्रेड डील से भारत को नई रफ्तार, निर्यातकों के लिए खुले बड़े बाज़ार

अमेरिका के टैरिफ दबाव के बीच भारत की रणनीतिक पहल: यूरोपीय संघ के साथ नया व्यापार समझौता-भारत ने अमेरिका की बढ़ती टैरिफ नीतियों के बीच अपनी व्यापार रणनीति को मजबूत करने के लिए यूरोपीय संघ (EU) के साथ एक महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया है। यह कदम भारत के लिए नए बाजार खोलने और व्यापारिक जोखिम को कम करने का एक बड़ा अवसर साबित होगा। आइए इस समझौते के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता: एक नई शुरुआत-27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा हुई। मूडीज़ रेटिंग्स के अनुसार, इस साल इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं और इसे लागू भी किया जा सकता है। यह समझौता भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह चुनिंदा देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव से खुद को सुरक्षित करना चाहता है।

यूरोपीय संघ के लिए भी फायदे का सौदा-मूडीज़ के मुताबिक, यह समझौता सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के लिए भी आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने वाला है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक बेहतर पहुंच से EU अपने व्यापार को विविध बना सकेगा और उन बाजारों पर निर्भरता कम करेगा जहां अचानक आर्थिक झटके लग सकते हैं।

दीर्घकालिक लाभ: व्यापार में स्थिरता और संतुलन-हालांकि मूडीज़ का मानना है कि इस समझौते से भारत और EU की क्रेडिट रेटिंग पर तुरंत बड़ा असर नहीं होगा, लेकिन लंबे समय में व्यापार का दायरा बढ़ेगा। इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे और बाजारों तक पहुंच ज्यादा स्थिर होगी, जो आर्थिक विकास के लिए लाभकारी होगा।

यूरोपीय उद्योगों को भारतीय मांग से फायदा-इस समझौते से यूरोप के ऑटोमोबाइल, मशीनरी, उपकरण और विमानन सेक्टर को खास लाभ मिलने की उम्मीद है। भारत में टैरिफ कम होने से इन क्षेत्रों में यूरोपीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे, जो भविष्य में बड़े पैमाने पर विकास का रास्ता बनाएंगे।

भारतीय निर्यातकों के लिए EU के बाजार का विस्तार-कपड़ा, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण जैसे भारतीय उत्पादों को इस समझौते से यूरोपीय संघ के बड़े और महंगे बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। इससे इन सेक्टरों की मांग बढ़ेगी और भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा।

MSME और रोजगार को मिलेगा नया उत्साह-मूडीज़ का कहना है कि इस समझौते से भारत की वैश्विक वैल्यू चेन में हिस्सेदारी बढ़ेगी। इससे माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को नए ऑर्डर मिलेंगे और उत्पादन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।

सस्ती मशीनरी से भारतीय उद्योग को बढ़ावा-यूरोप से मशीनरी और कंपोनेंट्स सस्ते दामों पर मिलने से भारतीय मैन्युफैक्चरर्स की लागत कम होगी। इससे उत्पादन बढ़ेगा और प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद बेचना आसान होगा। साथ ही, यूरोपीय ऑटो कंपनियों को भारत जैसे बड़े बाजार में नए मॉडल लॉन्च करने का मौका मिलेगा।

प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, सुधारों पर निर्भर सफलता-मूडीज़ ने चेतावनी दी है कि यूरोपीय आयात बढ़ने से कुछ घरेलू सेक्टरों, खासकर हाई-एंड मशीनरी में दबाव आ सकता है। इसलिए, इस समझौते का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब भारत कारोबारी माहौल सुधारने और नियमों को सरल बनाने जैसे सुधारों पर लगातार काम करता रहेगा। भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के लिए नए अवसर और स्थिरता लेकर आएगा। यह भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को मजबूत करेगा और अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच एक संतुलन बनाएगा। साथ ही, यह समझौता MSME, रोजगार और उद्योगों को भी नई ऊर्जा देगा, जिससे भारत की आर्थिक प्रगति को मजबूती मिलेगी।

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