बातचीत के बीच ट्रंप का बड़ा वार, ईरान पर फिर कसे गए सख्त प्रतिबंध

अमेरिका का ईरान पर नया आर्थिक प्रहार: ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति के तहत कड़े प्रतिबंध-तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत की कोशिशें जारी थीं, लेकिन अमेरिका ने ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति के तहत ईरान पर एक बार फिर बड़ा आर्थिक हमला किया है। इस बार अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल सेक्टर से जुड़ी 15 संस्थाओं और कई जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि ईरान को सख्त संदेश देने के लिए भी माना जा रहा है।
तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर अमेरिका का सीधा निशाना-अमेरिका ने ईरान की सबसे बड़ी कमाई के स्रोत तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार को टारगेट किया है। 15 संस्थाओं और 14 जहाजों पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के अवैध निर्यात को पूरी तरह रोकना चाहता है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि ये पैसे देश के विकास के बजाय आतंकवाद और अस्थिरता फैलाने में इस्तेमाल हो रहे हैं। इस आर्थिक प्रहार से ईरान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था और दबाव में आ सकती है।
मानवाधिकारों और आंतरिक दमन पर अमेरिका की सख्ती-अमेरिका ने इन प्रतिबंधों के पीछे मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा भी रखा है। ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसक कार्रवाई पर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। आंतरिक मंत्री एस्कंदर मोमेनी और आईआरजीसी के कुछ अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया गया है। हजारों प्रदर्शनकारियों की हत्या के आरोपों के चलते अमेरिका का मानना है कि जब तक ईरानी शासन अपने नागरिकों पर दमन बंद नहीं करता, तब तक उस पर दबाव बनाए रखना जरूरी है।
भ्रष्टाचार और डिजिटल करेंसी पर भी अमेरिका का शिकंजा-ट्रंप प्रशासन ने इस बार पारंपरिक आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ डिजिटल फाइनेंस पर भी कार्रवाई की है। अरबों डॉलर के गबन के आरोपी ईरानी निवेशक बाबक जंजानी और उनके जुड़े डिजिटल करेंसी एक्सचेंजों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। यह पहली बार है जब क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आईआरजीसी को फंड ट्रांसफर करने के आरोप में इतनी कड़ी कार्रवाई हुई है। अमेरिका का मकसद है कि ईरान के वैकल्पिक और डिजिटल रास्तों को भी पूरी तरह बंद किया जाए।
बातचीत जारी, लेकिन अनिश्चितता बनी हुई है-हालांकि इतने कड़े प्रतिबंधों के बावजूद बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने हालिया वार्ता को सकारात्मक शुरुआत बताया है और कहा कि उन्होंने अपने राष्ट्रीय हितों को स्पष्ट रूप से रखा है। लेकिन अमेरिका की एक साथ बातचीत और प्रतिबंध की नीति ने स्थिति को जटिल बना दिया है। अब आगे क्या होगा, यह काफी हद तक ईरान के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव और बातचीत का दौर वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस बीच आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक प्रयासों के बीच संतुलन बनाए रखना दोनों देशों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।



