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प्यार, संघर्ष और शांति: धर्मेंद्र के रिश्तों की अनसुनी दास्तां

धर्मेंद्र की जिंदगी का सच: प्रकाश कौर से हेमा मालिनी तक का सफर- बॉलीवुड के महान अभिनेता धर्मेंद्र के निधन ने पूरे देश को  गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके जाने के बाद भी लोग इस खबर को पचा नहीं पा रहे हैं। धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक युग के प्रतीक थे। उनकी जिंदगी में दो खास महिलाएं रहीं—पहली पत्नी प्रकाश कौर और बाद में हेमा मालिनी। इन रिश्तों की कहानी में कई अनसुनी बातें छुपी हैं, जो धर्मेंद्र की जिंदगी को बेहतर समझने में मदद करती हैं।

धर्मेंद्र और प्रकाश कौर: एक सादगी भरा आरंभ- धर्मेंद्र ने 1954 में प्रकाश कौर से शादी की थी, जब वे मात्र 19 साल के थे। उस वक्त वे फिल्मों की चमक-दमक से दूर, पंजाब के एक सामान्य परिवार में थे। उनकी जिंदगी में फिल्मों का कोई खास हिस्सा नहीं था। लेकिन 1959 में उन्होंने ‘फिल्मफेयर टैलेंट हंट’ जीतकर अपनी किस्मत बदली। इसके बाद 1960 में उनकी पहली फिल्म रिलीज हुई, जिसने उनके करियर की नींव रखी। इस दौरान उनका पारिवारिक जीवन शांत और निजी रहा। उनके चार बच्चे हुए—सनी, विजेता, अजीता और बॉबी देओल।

हेमा मालिनी की एंट्री और ऑन-स्क्रीन से ऑफ-स्क्रीन तक का सफर- धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की पहली मुलाकात 1970 में फिल्म ‘तुम हसीन मैं जवान’ के सेट पर हुई। उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया। ‘शराफत’, ‘नया जमाना’, ‘सीता और गीता’, ‘जुगनू’, ‘दोस्त’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों में उनकी जोड़ी बेहद लोकप्रिय हुई। धीरे-धीरे यह रिश्ता ऑफ-स्क्रीन भी गहरा होने लगा। कहा जाता है कि ‘शोले’ में धर्मेंद्र ने वीरू का किरदार इसलिए चुना ताकि वे हेमा के साथ ज्यादा वक्त बिता सकें।

शादी और विवाद: धर्मेंद्र-हेमा मालिनी का रिश्ता- 1980 में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी ने शादी की, जिसने कई अफवाहों और विवादों को जन्म दिया। धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा थे, इसलिए समाज में इस रिश्ते को लेकर कई सवाल उठे। उस वक्त प्रकाश कौर ने मीडिया से कहा था कि धर्मेंद्र भले ही आदर्श पति न हों, लेकिन वे अच्छे पिता हैं। उन्होंने हेमा मालिनी के प्रति सम्मान भी जताया। दोनों महिलाओं ने आपसी सम्मान के साथ दूरी बनाए रखी, जिससे परिवार में शांति बनी रही।

हेमा मालिनी का सम्मान और समझदारी भरा नजरिया- हेमा मालिनी ने हमेशा धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर का सम्मान किया। उन्होंने कभी भी परिवार में दखल नहीं दिया और न ही प्रतिस्पर्धा की। 1999 में एक शो में उन्होंने कहा था कि उन्होंने कभी प्रकाश कौर के घर में खलल नहीं डाला। उनका मानना था कि सच्चा प्यार कड़वाहट को खत्म कर देता है। हेमा का यह नजरिया उनके रिश्ते की परिपक्वता और संवेदनशीलता को दर्शाता है।

2015 की मुलाकात: जब परिवार के दो हिस्से मिले- 2015 में धर्मेंद्र के भाई की बीमारी के दौरान ईशा देओल और प्रकाश कौर की मुलाकात हुई। यह पल दर्शाता है कि भले ही रिश्तों में दूरी हो, लेकिन सम्मान हमेशा बना रहता है। ईशा ने बताया कि उन्होंने प्रकाश कौर से आशीर्वाद लिया, जो इस रिश्ते की गरिमा को दर्शाता है।

धर्मेंद्र की जिंदगी और उनके रिश्तों की यह कहानी हमें सिखाती है कि सम्मान, समझदारी और प्यार से हर मुश्किल रिश्ते को संभाला जा सकता है। यह सफर सिर्फ एक अभिनेता की जिंदगी का हिस्सा नहीं, बल्कि एक इंसान की जटिलताओं और संवेदनाओं का प्रतिबिंब है।

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