International

वैश्विक दक्षिण देशों की एकता जरूरी: S. Jaishankar ने UNGA में दिया संदेश

 दुनिया की आवाज़: जब भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ को एकजुट होने का दिया न्योता!

क्या सचमुच बदल रही है दुनिया की तस्वीर?-आजकल चारों तरफ एक ही बात सुनाई दे रही है – दुनिया बदल रही है। और इस बदलाव में सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं वो देश जिन्हें हम ‘ग्लोबल साउथ’ कहते हैं। ये वो देश हैं जो विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और अब दुनिया की बड़ी-बड़ी समस्याओं को सुलझाने में अपनी आवाज़ उठाना चाहते हैं। हमारे विदेश मंत्री, एस. जयशंकर, ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में इसी बात पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देश एक साथ आएं, अपने विचारों को साझा करें और दुनिया को दिखाएं कि वे भी किसी से कम नहीं हैं। ये सिर्फ़ कहने की बात नहीं है, बल्कि ये एक सच्चाई है जिसे दुनिया को स्वीकार करना होगा।

जब मुश्किलों का सामना करना हो, तो साथ मिलकर चलना ही बेहतर है!-सोचिए, जब दुनिया में इतनी सारी परेशानियाँ हों, तो क्या अकेले-अकेले इनसे निपटा जा सकता है? बिलकुल नहीं! यही वजह है कि हमारे विदेश मंत्री ने कहा कि विकासशील देशों के लिए ‘बहुपक्षवाद’ यानी मिलकर काम करना ही सबसे अच्छा रास्ता है। जब हम सब साथ मिलकर चलेंगे, तो हम अपनी समस्याओं का हल आसानी से ढूंढ पाएंगे। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए पाँच खास सुझाव भी दिए, जिनसे वे दुनिया में अपनी जगह बना सकें। ये सुझाव हमें सिखाते हैं कि कैसे हम एक-दूसरे से सीख सकते हैं, अपने अनुभव बाँट सकते हैं और मिलकर आगे बढ़ सकते हैं। ये वाकई एक बहुत ही ज़रूरी कदम है ताकि विकासशील देश भी दुनिया के फैसलों में अपनी अहम भूमिका निभा सकें।

संयुक्त राष्ट्र और पुरानी संस्थाओं को भी चाहिए नया अंदाज़!-सिर्फ़ मिलकर काम करना ही काफी नहीं है, बल्कि जिन पुरानी संस्थाओं के ज़रिए दुनिया चलती है, उन्हें भी बदलने की ज़रूरत है। संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को भी अब समय के साथ बदलना होगा ताकि वे आज की दुनिया की ज़रूरतों को पूरा कर सकें। हमारे मंत्री ने कहा कि विकासशील देशों को आगे आकर अपनी कहानियाँ, अपनी सफलताएँ और अपनी क्षमताएँ दुनिया को बतानी चाहिए। जैसे कि हमने वैक्सीन बनाने में क्या कमाल किया, या कैसे हमने डिजिटल दुनिया में छलांग लगाई। खेती के नए तरीके, पढ़ाई-लिखाई में सुधार और छोटे-मोटे बिज़नेस को कैसे आगे बढ़ाया जाए – ये सब बातें दुनिया को बतानी होंगी ताकि दूसरे देश भी इनसे सीख सकें। ये बदलाव बहुत ज़रूरी है ताकि दुनिया की हर आवाज़ सुनी जा सके।

अपनी बात रखो, दुनिया की सुनो, पर अपने हिसाब से चलो!-आजकल जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ी चिंता है। लेकिन जब बात आती है जलवायु न्याय की, तो ‘ग्लोबल साउथ’ को सिर्फ़ दूसरों की बात सुनकर ही काम नहीं करना चाहिए। बल्कि, इन देशों को खुद आगे बढ़कर ऐसे तरीके खोजने होंगे जो उनके अपने फायदे के लिए हों। इसका मतलब यह नहीं कि हम दूसरों से बात ही न करें, बल्कि इसका मतलब है कि हम अपनी ज़रूरतों और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए नए रास्ते बनाएँ। जैसे, हमें ये सोचना होगा कि हमारे लिए क्या सही है और फिर उस पर काम करना होगा। ये आत्मनिर्भरता का ही एक रूप है, जो ‘ग्लोबल साउथ’ को और मज़बूत बनाएगा।

नई तकनीक और भविष्य की दौड़ में पीछे न रहें!-आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और दूसरी नई-नई तकनीकें हर जगह छा रही हैं। ऐसे में, विकासशील देशों का इन बातों पर चर्चा में शामिल होना बहुत ज़रूरी है। अगर हम इन चर्चाओं में हिस्सा नहीं लेंगे, तो हम कहीं पीछे न रह जाएँ। भारत हमेशा से ही विकासशील देशों की आवाज़ बनता रहा है और उन्हें दुनिया के मंच पर अपनी बात रखने का मौका देता रहा है। हमारा लक्ष्य यही है कि ये देश भी वैश्विक एजेंडे में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें और दुनिया के भविष्य को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सकें।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button