फ्लोराइड वाला ज़हर बन रहा पानी: किल्लौद के गांवों में बिगड़ रही सेहत, कलेक्टर से गुहार

खंडवा के किल्लौद में पानी की समस्या: जानिए क्यों हो रही है लोगों की सेहत खराब-इंदौर के बाद अब खंडवा जिले के किल्लौद इलाके में पानी की समस्या ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। यहां दर्जनों गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर ग्रामीणों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इस समस्या का असर क्या है, सरकारी इंतजाम कितने कारगर हैं, और क्या समाधान निकाले जा रहे हैं।
किल्लौद के गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी से हो रही परेशानियां-खंडवा के किल्लौद इलाके के कई गांवों में लोग हैंडपंप और ट्यूबवेल के पानी में फ्लोराइड की अधिकता के कारण बीमार पड़ रहे हैं। बच्चों के दांत पीले पड़ रहे हैं, युवाओं के हाथों में दर्द और मुड़ने में दिक्कत हो रही है। पानी का स्वाद भी खराब है, जिससे पीने में परेशानी हो रही है। यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
दांत पीले होना, हाथों में दर्द और लीवर की समस्या बढ़ी-ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि फ्लोराइड की वजह से बच्चों के दांत पीले हो गए हैं और कई युवाओं के हाथ ठीक से काम नहीं कर रहे। साथ ही लीवर में इंफेक्शन जैसी गंभीर बीमारियां भी सामने आ रही हैं। यह सब पानी की खराब गुणवत्ता के कारण हो रहा है, जिससे लोग धीरे-धीरे बीमार होते जा रहे हैं।
सरकारी इंतजामों में कमी, शुद्ध पानी की व्यवस्था अधूरी-ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर शुद्ध पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दूषित जल स्रोतों की पहचान जरूर की, लेकिन उन्हें पूरी तरह बंद नहीं किया गया और फिल्टर प्लांट की योजना भी जमीन पर लागू नहीं हुई।
फ्लोरोसिस और अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं-खंडवा के किल्लौद क्षेत्र में फ्लोराइड की अधिकता से फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी फैल रही है। कई लोगों की नजर कमजोर हो रही है, दांत गिर रहे हैं, बाल जल्दी सफेद हो रहे हैं और जोड़ों में दर्द बना रहता है। जांच में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 2.0 से 5.0 पीपीएम तक पाई गई है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
नल जल योजना का पानी भी सुरक्षित नहीं-किल्लौद ब्लॉक के गरबड़ी गांव में नल जल योजना के तहत जो पानी घरों तक पहुंच रहा है, उसमें भी फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। गांव की करीब तीन हजार की आबादी के लिए सिर्फ एक बोरवेल है, जिससे सभी को पानी मिल रहा है। इस पानी की गुणवत्ता खराब होने से लोग परेशान हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी: इंदौर जैसी घटना न हो-गरबड़ी गांव के शिवराज सिंह ने कहा कि वे इंदौर जैसी घटना से बचना चाहते हैं, इसलिए कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देकर सुरक्षित पानी की मांग की है। किल्लौद ब्लॉक के सात गांवों में फ्लोराइड की मात्रा लगातार अधिक मिल रही है, जिससे हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
कलेक्टर का बयान: दूषित पानी पर लग रहे लाल निशान-खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता ने बताया कि कुछ गांवों में पानी में फ्लोराइड की अधिकता की शिकायत मिली है। जांच के बाद PHE टीम ने उन हैंडपंप और ट्यूबवेल पर लाल निशान लगाकर लोगों को पानी इस्तेमाल न करने की सलाह दी है ताकि वे सुरक्षित रह सकें।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग से समाधान की दिशा में कदम-कलेक्टर ने बताया कि ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, तालाब और वाटर टैंक बनाएं ताकि साफ पानी इकट्ठा किया जा सके। इससे फ्लोराइड युक्त पानी को कम किया जा सकेगा और लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा। खंडवा के किल्लौद इलाके में पानी की समस्या गंभीर है और इससे लोगों की सेहत पर गहरा असर पड़ रहा है। सरकारी प्रयास तो हो रहे हैं, लेकिन अभी ठोस और स्थायी समाधान की जरूरत है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपायों से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन बेहतर और तेज कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीणों को साफ और सुरक्षित पानी मिल सके।



