वर्ल्ड फूड इंडिया 2025: खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद

वर्ल्ड फूड इंडिया 2025: भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश का महाकुंभ!
निवेश और एमओयू: उम्मीदों के नए पंख-वर्ल्ड फूड इंडिया 2025, यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बताया कि इस बार हम एक लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा के निवेश की उम्मीद कर रहे हैं। सोचिए, यह कितनी बड़ी बात है! अभी तक लगभग 65,000 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिसमें रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और कोका-कोला जैसी दिग्गज कंपनियाँ भी शामिल हैं। यह दिखाता है कि दुनिया भारत के खाद्य क्षेत्र में कितना भरोसा कर रही है। यह सम्मेलन हमारे देश के खाद्य प्रसंस्करण को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा, जिससे किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक सभी को फायदा होगा।
सीईओ गोलमेज: जीएसटी पर संतुष्टि और भविष्य की राह-इस महत्वपूर्ण आयोजन में उद्योग जगत के बड़े-बड़े सीईओ भी शामिल हुए। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में हुए इस गोलमेज सम्मेलन में सीईओज़ ने जीएसटी दरों को लेकर अपनी खुशी जाहिर की। पिछले साल उन्होंने जीएसटी दरों को और बेहतर बनाने की बात उठाई थी, और इस बार सरकार ने उनकी चिंताओं को सुना और ठोस कदम उठाए हैं। इससे यह साफ है कि सरकार उद्योग जगत की ज़रूरतों को समझ रही है और मिलकर काम करने को तैयार है। यह आपसी तालमेल ही भारत को आर्थिक रूप से और मज़बूत बनाएगा।
भव्य आयोजन: भारत मंडपम में दुनिया का जमावड़ा-यह सम्मेलन प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है, और इसका पैमाना भी काबिले तारीफ है। करीब एक लाख वर्गमीटर में फैला यह अब तक का सबसे बड़ा खाद्य प्रसंस्करण सम्मेलन है। इसमें 21 देशों के लोग हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें न्यूजीलैंड और सऊदी अरब जैसे देश ‘साझीदार देश’ के तौर पर शामिल हैं। वहीं, जापान, रूस, यूएई और वियतनाम जैसे देश ‘फोकस देश’ हैं। यह आयोजन भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगा और दुनिया को हमारी खाद्य क्षमता से रूबरू कराएगा।
राज्यों और मंत्रालयों की एकजुटता: एक साझा प्रयास-इस सम्मेलन में सिर्फ विदेशी मेहमान ही नहीं, बल्कि भारत के 21 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश भी पूरी सक्रियता से भाग ले रहे हैं। साथ ही, 10 केंद्रीय मंत्रालय, 5 सरकारी संगठन और 1700 से ज़्यादा कंपनियाँ अपने उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन कर रही हैं। यह सब मिलकर एक ऐसा मंच तैयार कर रहे हैं जहाँ केंद्र और राज्य सरकारें एक साथ मिलकर काम कर सकें। इससे न केवल आपसी सहयोग बढ़ेगा, बल्कि हमारे उद्योग जगत को भी नई ताकत मिलेगी और वे वैश्विक बाज़ार में और बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
पिछले आयोजनों से तुलना: विकास की नई उड़ान-केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बताया कि पिछले सम्मेलनों की तुलना में इस बार का आयोजन कहीं ज़्यादा बड़ा और प्रभावशाली होने वाला है। जहाँ 2023 के सम्मेलन में लगभग 33,000 करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए थे, वहीं इस बार उम्मीद है कि यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपये के पार जाएगा। यह एक अभूतपूर्व वृद्धि है जो भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की बढ़ती क्षमता और वैश्विक आकर्षण को दर्शाती है। यह सम्मेलन निश्चित रूप से हमारे उद्योग को एक नई दिशा और अभूतपूर्व गति प्रदान करेगा।




