योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान: “अब कोई भी इलाके की जनसंख्या संरचना नहीं बदल पाएगा”

योगी का जनसंख्या पर कड़ा प्रहार: “बदलाव की कोशिश करने वालों को पलायन करना होगा!”
जनसंख्या संतुलन पर सरकार का सख्त रवैया-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान जनसंख्या बदलाव (Demography Change) को लेकर एक बेहद कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रदेश में अब ‘डबल इंजन की सरकार’ है और किसी भी व्यक्ति या समूह को राज्य की जनसंख्या संरचना के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो भी ऐसे किसी भी प्रयास में लिप्त पाया जाएगा, उसे प्रदेश और जिले दोनों से ही बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। यह बयान उन्होंने प्रतापगढ़ में एक सभा को संबोधित करते हुए दिया, जिससे यह साफ हो गया कि सरकार इस मुद्दे पर कोई भी नरमी नहीं बरतेगी।
कांग्रेस और सपा पर तुष्टिकरण का आरोप-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों के शासनकाल में जानबूझकर हिंदुओं को निशाना बनाया गया और ऐसे हालात पैदा किए गए कि उन्हें अपनी जमीन छोड़कर जाना पड़े। योगी के अनुसार, यह सब तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में जनसंख्या संतुलन को बदलना था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने अपनी नीतियों से हिंदू समाज को कमजोर किया, जिसके चलते कई जगहों पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन देखे गए।
संभल की रिपोर्ट: चौंकाने वाले खुलासे-मुख्यमंत्री का यह बयान संभल में हुई हालिया हिंसा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। एक न्यायिक आयोग ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, जिसमें संभल की जनसंख्या में आजादी के बाद से आए बड़े बदलावों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 1947 में जहां हिंदुओं की आबादी लगभग 45 प्रतिशत थी, वहीं आज यह घटकर मात्र 15 प्रतिशत रह गई है। इसके विपरीत, मुस्लिम आबादी 55 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह रिपोर्ट जनसंख्या के बदलते समीकरणों पर एक गंभीर सवाल उठाती है।
450 पन्नों की रिपोर्ट और विवादित दावे-यह रिपोर्ट कुल 450 पन्नों की है और इसमें संभल में हुए दंगों के इतिहास का विस्तृत विवरण शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट की पूरी सामग्री अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर है कि इसमें यह भी कहा गया है कि जिस मस्जिद को लेकर हाल ही में विवाद हुआ था, उसका निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर की नींव पर किया गया था। इस तरह के दावे रिपोर्ट को और भी विवादास्पद बनाते हैं और राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे रहे हैं।
रिपोर्ट पर राजनीतिक घमासान-इस रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस रिपोर्ट को अपने आरोपों के सबूत के तौर पर पेश कर रही है और विपक्ष पर तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है। बीजेपी का कहना है कि यह रिपोर्ट साबित करती है कि पिछली सरकारों ने हिंदुओं को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं, विपक्षी दल इस रिपोर्ट को बीजेपी का राजनीतिक एजेंडा बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि वे इसका इस्तेमाल केवल चुनावी फायदा उठाने के लिए कर रहे हैं।
योगी सरकार का अटूट संकल्प-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर दोहराया है कि उनकी सरकार में कानून व्यवस्था से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी लोग राज्य में जनसंख्या संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उन्हें प्रदेश से बाहर जाना होगा। उनका मानना है कि डबल इंजन की सरकार के सत्ता में आने के बाद अब ऐसी स्थितियां दोबारा नहीं बनने दी जाएंगी, जहाँ पहले कभी ऐसी समस्याएं उत्पन्न हुई थीं।
आगे क्या होगा?-यह देखना दिलचस्प होगा कि इस रिपोर्ट के आने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच यह राजनीतिक जंग किस दिशा में आगे बढ़ती है। क्या सरकार इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करेगी या इसे केवल एक राजनीतिक संदेश के रूप में इस्तेमाल करेगी, यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख एजेंडा बनने वाला है, और इसका असर चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।



