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Politics

104 साल के मतदाता का सवाल: “क्या 100 साल से ज्यादा जीना गुनाह है?” वोटर लिस्ट में नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में डालने पर विवाद

104 साल के शेख इब्राहिम का वोटिंग अधिकार विवाद: आखिर क्यों रोका गया वोट देने से?-पश्चिम बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 104 साल के शेख इब्राहिम का नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी विवादित श्रेणी में डाल दिया गया है। ऐसे बुजुर्ग मतदाता जो दशकों से हर चुनाव में वोट डालते आए हैं, अब खुद सवाल कर रहे हैं कि इस बार उन्हें वोटिंग से क्यों रोका जा रहा है। इस लेख में हम इस मामले की पूरी कहानी और राजनीतिक विवाद पर नजर डालेंगे।

100 साल से ज्यादा उम्र के मतदाता का लोकतंत्र में सवाल-शेख इब्राहिम, जो पूर्व बर्दवान जिले के जमालपुर ग्राम पंचायत के रहने वाले हैं, कहते हैं कि उन्होंने देश के पहले आम चुनाव से लेकर अब तक हर चुनाव में वोट डाला है। उनका सवाल है, “क्या 100 साल से ज्यादा जीना कोई अपराध है? मैंने हमेशा अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल किया है। इस बार मुझे वोट क्यों नहीं देने दिया जा रहा? यह मेरा देश है।” उनकी बातों में गहरी निराशा और हैरानी साफ झलकती है।

सुनवाई के बाद भी नाम विवादित श्रेणी में-इब्राहिम के 70 वर्षीय बेटे के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कुछ तथ्यों में ‘तार्किक विसंगति’ बताकर उनके पिता को सुनवाई के लिए बुलाया था। अधिकारी घर आकर जरूरी दस्तावेज भी देखे। परिवार को भरोसा मिला कि नाम सूची में रहेगा, लेकिन जब अंतिम सूची आई तो उनका नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ में था। यह स्थिति परिवार के लिए समझ से बाहर है और वे असमंजस में हैं।

TMC ने उठाए सवाल, राजनीतिक आरोप तेज-इस मामले को लेकर All India Trinamool Congress ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि 104 साल के बुजुर्ग मतदाता को बेवजह परेशान किया गया। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या इतने बुजुर्ग व्यक्ति को इस तरह सुनवाई के लिए बुलाना सही है? साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या वैध मतदाताओं के नाम हटाकर चुनाव से पहले माहौल प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। इस मुद्दे ने राजनीतिक सियासत को भी गर्मा दिया है।

आयोग और बीजेपी की प्रतिक्रिया का इंतजार-अब तक Election Commission of India और Bharatiya Janata Party की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा में बना हुआ है। एक तरफ एक बुजुर्ग मतदाता अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहा है, तो दूसरी ओर इस मुद्दे ने चुनावी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

शेख इब्राहिम का मामला सिर्फ एक वोटर की समस्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल अधिकारों पर सवाल उठाता है। 104 साल की उम्र में भी वोट देने का अधिकार बनाए रखना हर लोकतंत्र की ताकत है। इस विवाद से साफ होता है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सम्मान की जरूरत है, ताकि हर नागरिक का हक सुरक्षित रहे।

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