
बिना OTP या लिंक के खाते से उड़ाए 3 लाख रुपये, जबलपुर में साइबर ठगी ने बढ़ाई चिंता-जबलपुर में एक ऐसा साइबर ठगी का मामला सामने आया है जिसने डिजिटल बैंकिंग इस्तेमाल करने वालों की चिंता बढ़ा दी है। एक फैक्ट्री कर्मचारी के खाते से बिना किसी OTP या संदिग्ध लिंक पर क्लिक किए करीब 3 लाख रुपये गायब हो गए। यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी अब नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम को हैक करना आसान हो गया है। इस मामले ने साइबर सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
फैक्ट्री कर्मचारी बना साइबर ठगों का निशाना-जबलपुर के लॉर्डगंज इलाके में रहने वाले नितिन शाह, जो एक निजी फैक्ट्री में काम करते हैं, साइबर अपराधियों के शिकार बने। उन्होंने बताया कि उनके मोबाइल को इस तरह हैक किया गया कि उन्हें पता भी नहीं चला। नितिन के मुताबिक, उन्हें कोई संदिग्ध कॉल या मैसेज नहीं मिला, लेकिन फिर भी अपराधियों ने उनके मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना ली और बड़ी रकम निकाल ली।
दो दिन में तीन बार खाते पर हमला-साइबर ठगों ने 27 मई से 29 मई के बीच दो दिनों में तीन बार नितिन के बैंक खाते से ट्रांजेक्शन किया। इन ट्रांजेक्शनों में करीब 3 लाख रुपये निकाल लिए गए। सबसे हैरानी की बात यह थी कि नितिन को तब पता चला जब उनकी रकम काफी कम हो चुकी थी। उन्होंने तुरंत बैंक और पुलिस से संपर्क किया।
न तो कोई लिंक आया, न OTP मांगा गया-इस ठगी की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नितिन को कोई फिशिंग लिंक नहीं भेजा गया और न ही किसी ने OTP मांगा। आमतौर पर साइबर ठग लिंक या OTP के जरिए खाते तक पहुंचते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। इससे लगता है कि अपराधियों ने किसी उन्नत तकनीक या मालवेयर का इस्तेमाल किया होगा।
एडवांस मालवेयर की आशंका-तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि बिना बैंकिंग जानकारी साझा किए भी अगर रकम निकल गई तो इसका मतलब मोबाइल हैकिंग या मालवेयर अटैक हो सकता है। ऐसे मालवेयर चुपके से फोन में घुस जाते हैं और बैंकिंग ऐप्स, मैसेज आदि तक पहुंच बनाकर नुकसान पहुंचाते हैं। जांच पूरी होने पर ही सही वजह सामने आएगी।
शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच-नितिन शाह ने लॉर्डगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर शिकायत दर्ज करना जरूरी है ताकि पैसे की ट्रैकिंग और अपराधियों तक पहुंच संभव हो सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।
साइबर सेल की मदद से चल रही तकनीकी जांच-पुलिस ने साइबर सेल की मदद ली है जो जांच कर रही है कि रकम कहां ट्रांसफर हुई और किस तकनीक से हैकिंग हुई। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और इंटरनेट गतिविधियों के रिकॉर्ड की भी जांच हो रही है। संदिग्ध IP एड्रेस और डिजिटल सुरागों को भी खंगाला जा रहा है।
बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सतर्कता जरूरी-साइबर अपराधी अब सिर्फ कॉल, लिंक या OTP पर भरोसा नहीं करते, बल्कि नई तकनीक से लोगों को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल भरोसेमंद ऐप्स ही इंस्टॉल करें, अनजान फाइलें डाउनलोड न करें और फोन का सिक्योरिटी अपडेट करते रहें। बैंक खाते में असामान्य ट्रांजेक्शन पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।
यह मामला सबके लिए चेतावनी-जबलपुर की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि डिजिटल बैंकिंग इस्तेमाल करने वाले सभी के लिए चेतावनी है। साइबर अपराधी लगातार नए तरीके खोज रहे हैं और उनकी तकनीक पहले से ज्यादा उन्नत हो चुकी है। इसलिए OTP के साथ-साथ मोबाइल सुरक्षा और डिजिटल सतर्कता भी जरूरी हो गई है। थोड़ी सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है।



