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IMF से पाकिस्तान को राहत और भारत की चुप्पी पर विवाद: हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

 IMF मामले में कांग्रेस पर हिमंत बिस्व सरमा का पलटवार: सच जानिए!- यह लेख असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा द्वारा कांग्रेस नेताओं पर लगाए गए आरोपों पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता IMF के पाकिस्तान को दिए जा रहे ऋण के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं।

कांग्रेस का झूठा प्रचार?- हिमंत बिस्व सरमा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता जैराम रमेश और पवन खेड़ा जानबूझकर भारत के रुख को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं और देश को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘गंभीर और खतरनाक प्रचार’ बताया। सरमा का कहना है कि कांग्रेस नेताओं द्वारा फैलाई जा रही यह गलत जानकारी देश की छवि को नुकसान पहुंचा रही है और भारत की अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति को राजनीति का मुद्दा बना रही है। उनका मानना है कि यह रवैया देश की एकता और मजबूती को भी कमजोर कर सकता है। सरमा ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता या तो जानबूझकर या फिर जानकारी की कमी के कारण ऐसी बातें कह रहे हैं जो भारत की छवि को कमजोर करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए और कांग्रेस को अपने बयानों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। यह आरोप एक ऐसे समय पर लगाया गया है जब भारत ने IMF द्वारा पाकिस्तान को दिए जा रहे ऋण पर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि इसका इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया जा सकता है।

IMF में वोटिंग प्रक्रिया और भारत का रुख-सरमा ने स्पष्ट किया कि IMF में ‘नो’ वोट का कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई देश किसी प्रस्ताव से असहमत है, तो वह वोटिंग से परहेज कर सकता है, जिसे ‘अबस्टेन’ कहा जाता है। भारत ने पाकिस्तान को दिए जा रहे ऋण पर यही रणनीति अपनाई। उन्होंने बताया कि IMF में वोटिंग यूनाइटेड नेशंस के विपरीत है, जहाँ हर देश का वोट समान होता है। IMF में, वोटिंग पावर देश की आर्थिक हिस्सेदारी पर निर्भर करती है। भारत ने अबस्टेन करके यह संदेश दिया कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश का समर्थन नहीं करता, लेकिन वैश्विक आर्थिक स्थिरता को भी नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता। यह एक रणनीतिक कदम था जिसने भारत की मजबूत और संतुलित विदेश नीति को दर्शाया।

भारत का साफ संदेश: आतंकवाद को कोई समर्थन नहीं-सरमा ने कहा कि भारत के IMF में अबस्टेन करने के फैसले ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत उस देश का समर्थन नहीं करेगा जो सीमा पार आतंकवाद में शामिल है। उन्होंने इस कदम को मजबूत और कूटनीतिक रूप से संतुलित बताया। उन्होंने कहा कि भारत न तो पाकिस्तान की चालबाजियों को नजरअंदाज करेगा और न ही वैश्विक आर्थिक व्यवस्थाओं में अनावश्यक बाधा डालेगा। उन्होंने उरी, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत हमेशा से आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए दृढ़ रहा है और IMF पर यह रणनीति भी उसी दृढ़ संकल्प का परिणाम है।

 कांग्रेस की आलोचना और भारत की परिपक्व विदेश नीति-सरमा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह भारत की अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति को राजनीति का मुद्दा बना रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने IMF में बेहद समझदारी से कदम उठाया है, जो भारत की परिपक्व विदेश नीति और अपने राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सरमा का मानना है कि कांग्रेस नेताओं का यह रवैया देश की एकता और मजबूती को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयान भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर कर रहे हैं।

 कांग्रेस की मांग और भारत सरकार का जवाब- यह पूरा विवाद कांग्रेस नेता जैराम रमेश के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को IMF में पाकिस्तान को दिए जा रहे ऋण के खिलाफ ‘नो’ वोट देना चाहिए था। हालांकि, भारत ने वोटिंग से परहेज किया और स्पष्ट किया कि उसे आशंका है कि पाकिस्तान इस धन का इस्तेमाल सीमा पार आतंकवाद के लिए कर सकता है। वित्त मंत्रालय ने भी एक बयान जारी करके इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान का ऋण लेने का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है और इस धन का दुरुपयोग होने की आशंका है।

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