MP-झारखंड राज्यसभा चुनाव: BJP का बड़ा दांव, कांग्रेस की चिंता

मध्यप्रदेश-झारखंड राज्यसभा चुनाव: BJP का बड़ा दांव, कांग्रेस की चिंता बढ़ी-राज्यसभा चुनावों को लेकर देश की राजनीति में फिर से हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने मध्यप्रदेश में अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर और झारखंड में एक स्वतंत्र उम्मीदवार को समर्थन देकर कांग्रेस की रणनीति को चुनौती दी है। इससे कांग्रेस की उन दो सीटों पर संकट गहरा गया है, जिन्हें वह पहले सुरक्षित मान रही थी। कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए रणनीति बना रही है और उन्हें पार्टी शासित राज्यों में भेजने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस की बढ़ती चिंता और विधायकों की शिफ्टिंग की तैयारी-राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को सबसे बड़ी चिंता अपने विधायकों को एकजुट रखने की है। पार्टी को डर है कि विपक्षी दल विधायकों को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए कांग्रेस ने मध्यप्रदेश और झारखंड के विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की योजना बनाई है। कुछ विधायकों को कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में रखा जा सकता है ताकि मतदान तक पार्टी की एकजुटता बनी रहे। राजनीतिक गलियारों में इस योजना को लेकर चर्चा तेज है।
राज्यसभा में बहुमत बढ़ाने की BJP की रणनीति-विश्लेषकों का मानना है कि BJP का यह कदम सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि राज्यसभा में अपनी संख्या बढ़ाने की रणनीति है। हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए राज्यसभा में मजबूत बहुमत की जरूरत महसूस की गई है। इसलिए BJP हर संभावित सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। भविष्य में संवैधानिक फैसलों के लिए अतिरिक्त समर्थन हासिल करना पार्टी की प्राथमिकता है।
कांग्रेस का BJP पर आरोप: विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश-कांग्रेस ने BJP पर आरोप लगाया है कि मध्यप्रदेश और झारखंड में उम्मीदवार उतारना विधायकों की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देना है। पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि BJP पहले भी ऐसी कोशिशें कर चुकी है, लेकिन सफल नहीं हुई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे अपने विधायकों के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी भी दबाव या प्रलोभन से निपटने को तैयार हैं।
झारखंड में परिमल नाथवानी की एंट्री से बदला समीकरण-झारखंड में स्वतंत्र उम्मीदवार परिमल नाथवानी की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं। नाथवानी पहले भी राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं और राजनीतिक व कारोबारी क्षेत्र में प्रभावशाली हैं। BJP के समर्थन से उनकी चुनौती कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के लिए आसान नहीं है। झारखंड विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या होने के बावजूद कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है।
परिमल नाथवानी का राजनीतिक और कारोबारी सफर-गुजरात के रहने वाले परिमल नाथवानी लंबे समय तक उद्योग जगत से जुड़े रहे हैं। वे झारखंड से स्वतंत्र राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और बाद में आंध्र प्रदेश से भी सांसद बने। उनका नाम नरेंद्र मोदी स्टेडियम के निर्माण और प्रबंधन से भी जुड़ा है। राजनीति और कॉर्पोरेट जगत में उनकी पकड़ उन्हें प्रभावशाली उम्मीदवार बनाती है।
मध्यप्रदेश में मीनाक्षी नटराजन की राह हुई कठिन-मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। विधानसभा के मौजूदा गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन BJP ने चौथे उम्मीदवार महेश केवट को उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। BJP को जीत के लिए अतिरिक्त वोट चाहिए, लेकिन कांग्रेस के भीतर असंतोष BJP के लिए मददगार साबित हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव बना प्रतिष्ठा की लड़ाई-विशेषज्ञ मानते हैं कि यह चुनाव सिर्फ सीटों की संख्या का मामला नहीं, बल्कि दोनों दलों की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। BJP अपनी ताकत दिखाना चाहती है, जबकि कांग्रेस अपनी एकजुटता साबित करने में लगी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि BJP अपने दांव में सफल होती है या कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखकर सीटें बचा पाती है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव ने राजनीति में नया रोमांच पैदा कर दिया है।



