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डॉलर के मुकाबले फिर फिसली रुपया की कीमत: जानिए इसके पीछे की बड़ी वजहें

 रुपया हुआ कमजोर: क्या है वजह और आगे क्या होगा?-भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है, जिससे आम लोगों से लेकर बाजार विशेषज्ञों तक सभी चिंतित हैं। आज हम इस गिरावट के पीछे के कारणों और भविष्य की संभावनाओं पर एक विस्तृत नज़र डालेंगे।

 शुरुआती झटका: 13 पैसे की गिरावट-मंगलवार को रुपये ने डॉलर के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट देखी, और यह 85.55 के स्तर पर पहुँच गया। घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी की निकासी को इसके पीछे मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर में थोड़ी कमजोरी आई, लेकिन इसका असर रुपये पर नज़र नहीं आया।

बाजार में स्थिरता, लेकिन खतरा कायम-रुपया 85.47 पर खुला और फिर 85.55 तक नीचे आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई नया आर्थिक संकेतक नहीं है जिससे रुपये की दिशा तय हो। स्थिरता दिख रही है, लेकिन दबाव भी बना हुआ है। डॉलर की बढ़ती मांग रुपये पर असर डाल रही है।

 अमेरिका की चेतावनी: वैश्विक बाजारों पर असर-अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी की चेतावनी कि अमेरिका कुछ व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ लगा सकता है, ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। निवेशकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि इससे व्यापार में रुकावट और मंदी का खतरा बढ़ सकता है। इसका सीधा असर डॉलर और रुपये दोनों पर पड़ रहा है।

 डॉलर इंडेक्स में गिरावट, लेकिन रुपये पर सीमित असर-डॉलर इंडेक्स में मामूली गिरावट आई है, लेकिन इसका रुपये पर कोई खास सकारात्मक असर नहीं दिखा। घरेलू निवेशक अभी भी सतर्क हैं, और घरेलू कारकों का प्रभाव रुपये पर ज्यादा दिख रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता, लेकिन चिंता बरकरार-ब्रेंट क्रूड में मामूली बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अमेरिका-ईरान समझौते और रूस-यूक्रेन युद्ध की अनिश्चितता बनी हुई है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रुपये की स्थिरता के लिए एक बड़ा कारक है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर बातचीत, लेकिन बाजार सतर्क-अमेरिकी और रूसी राष्ट्रपतियों के बीच बातचीत के बाद सीजफायर की उम्मीद जगी है, लेकिन बाजारों ने इस पर बहुत उत्साह नहीं दिखाया। युद्ध की अनिश्चितता वैश्विक बाजारों और रुपये पर असर डालती है।

घरेलू शेयर बाजार में हल्की तेजी, लेकिन एफआईआई की बिकवाली जारी-घरेलू शेयर बाजार में हल्की तेजी देखी गई, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) अभी भी बिकवाली कर रहे हैं। एफआईआई की बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।

कई कारक हैं जिम्मेदार-रुपये में गिरावट के कई कारण हैं, जिनमें घरेलू और वैश्विक दोनों कारक शामिल हैं। अमेरिका की नीतियों, रूस-यूक्रेन युद्ध, और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का रुपये पर सीधा असर पड़ रहा है। आगे क्या होगा, यह इन कारकों पर निर्भर करेगा।

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