MP में नर्सिंग एग्जाम स्कैम का बड़ा खुलासा: 150 कॉपियां जांचीं एक दिन में, पासवर्ड तक बांटे गए

मध्य प्रदेश नर्सिंग परीक्षा घोटाला: चार साल की चुप्पी, अब हुआ खुलासा!- यह मामला मध्य प्रदेश की नर्सिंग परीक्षाओं से जुड़ा है, जहाँ चार साल बाद आयोजित हुई GNM और ANM की परीक्षाओं में बड़ा घोटाला सामने आया है। परीक्षाओं की जाँच के दौरान हुई धांधली ने न सिर्फ़ परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं बल्कि पूरे सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कॉपी चेकिंग में हुआ खेल: नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं- कॉपी जांचने वाले शिक्षकों ने नियमों की पूरी तरह से अवहेलना की। उन्होंने अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड दूसरों को दे दिए, जबकि नियमों के अनुसार यह सख्त मना है। एक शिक्षक को एक दिन में 70 कॉपियाँ जांचने की अनुमति है, लेकिन कई शिक्षकों ने 150 से ज़्यादा कॉपियाँ जांचीं। इस लापरवाही ने परीक्षा की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह साफ़ है कि पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और परीक्षा परिणामों पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है।
तकनीकी जांच से खुलासा: राज्य से बाहर से हुई कॉपी जांच!- काउंसिल की तकनीकी टीम ने जब लॉगिन गतिविधियों की जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कुछ शिक्षकों के अकाउंट्स की एक्टिविटी मध्य प्रदेश से सैकड़ों किलोमीटर दूर देखी गई! यानी, पासवर्ड राज्य के बाहर के लोगों को दिए गए थे और वे राज्य से बाहर बैठकर कॉपियां जांच रहे थे। यह परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तरह से विफलता को दर्शाता है। यह एक गंभीर सुरक्षा चूक है जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
सिर्फ़ चेतावनी! कार्रवाई की कमी से छात्रों में रोष- इतनी बड़ी गड़बड़ी के बावजूद नर्सिंग काउंसिल ने सिर्फ़ चेतावनी देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे छात्रों में काफी रोष है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही पर कोई ठोस एक्शन क्यों नहीं लिया गया? क्या सिर्फ़ चेतावनी से ऐसे घोटालों को रोका जा सकता है? यह सवाल सभी के मन में है।
NSUI की मांग: दोषियों के खिलाफ़ FIR और निलंबन- NSUI के प्रदेश अध्यक्ष रवि परमार ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ़ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि आईटी एक्ट और एमपी सिविल सर्विस रूल्स का भी उल्लंघन है। उन्होंने दोषी शिक्षकों के खिलाफ़ FIR दर्ज करने और उन्हें तुरंत निलंबित करने की मांग की है। उनका मानना है कि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में ऐसे मामले बढ़ते ही जाएँगे।



