छत्तीसगढ़ की बेटियों ने रचा इतिहास: सुकमा की 8 महिला फुटबॉल खिलाड़ियों का खेलो इंडिया एकेडमी में चयन

सुकमा की बेटियां: खेलो इंडिया का सपना साकार-छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की आठ बेटियों ने खेलो इंडिया एकेडमी में जगह बनाकर सबको चौंका दिया है। ये बेटियां दूर-दराज़ के गांवों से हैं और अपनी मेहनत और लगन से ये मुकाम हासिल किया है। ये सिर्फ़ एक खेल की जीत नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक बड़ी मिसाल है।
एकेडमी में मिलेगा पढ़ाई और खेल का बेहतरीन माहौल-खेलो इंडिया एकेडमी में इन लड़कियों को फुटबॉल के साथ-साथ अच्छी शिक्षा, पौष्टिक खाना, और बेहतरीन प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। यहां अनुशासित माहौल होगा ताकि वो अपनी पढ़ाई और खेल दोनों में आगे बढ़ सकें। ये एकेडमी उन्हें एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने में मदद करेगी। इससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का भी मौका मिलेगा।
कड़ी मेहनत की जीत: रायपुर में हुआ चयन-इन आठ खिलाड़ियों का चयन अप्रैल 2025 में रायपुर में हुए ट्रायल्स में हुआ। कई सौ लड़कियों ने ट्रायल दिया था, लेकिन इन बेटियों ने अपनी काबिलियत और खेल में लगन से सबको पीछे छोड़ दिया। उनका फुटबॉल खेलना ही नहीं, बल्कि फिटनेस और एकाग्रता भी बेहतरीन थी। अधिकारियों ने इनकी मेहनत की तारीफ की है।
सुकमा के लिए गर्व का पल, युवाओं के लिए प्रेरणा-सुदूर और संसाधनों की कमी वाले सुकमा जिले के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि है। इन बेटियों की कामयाबी से जिले के दूसरे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। यह दिखाता है कि अगर आपका इरादा पक्का हो, तो आप कोई भी सपना पूरा कर सकते हैं।
ये हैं वो बेटियां, जिन पर सुकमा को नाज़ है
* किच्चे ललिता (पोलमपल्ली)
* माड़वी पूजा (चिंतागुफा)
* संध्या नाग (कोकावाड़ा)
* शारदा प्रधानी (चिपुरपाल)
* लक्ष्मी सोढ़ी (करिगुंडम, चिंतागुफा)
* सोढ़ी कोईंदे (चिंतागुफा)
* माही कुंजाम (कोर्रा)
* किच्चे लक्ष्मी (पोलमपल्ली)
इन बेटियों की कहानी ये बताती है कि गांव में भी बड़े-बड़े सपने देखे जा सकते हैं। बस ज़रूरत है मेहनत, मौके की, और हिम्मत की।
एक नई शुरुआत: सपनों को सच करने की यात्रा- आज ये आठ बेटियां पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी कामयाबी से और भी लड़कियों को अपने सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला मिलेगा। ये सिर्फ़ एक चयन नहीं, बल्कि सपनों को साकार करने की एक नई शुरुआत है।




